सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों को मंजूरी देने के संबंध में न्यायालय कोई समय सीमा तय नहीं कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि यदि राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को अनुच्छेद 200 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना रोके रखते हैं तो यह संघीय ढांचे के हित में नहीं होगा।
यह मत राष्ट्रपति के उस संदर्भ पर आया जिसमें विधेयको के राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए समय सीमा को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इससे पहले तमिलनाडु विधेयक मामले में सर्वोच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ ने राज्यपाल आर. एन. रवि द्वारा लंबे समय तक कोई कार्यवाही न करने को अवैध और मनमाना बताया था। सर्वोच्च न्यायालय ने विधानसभा से दूसरी बार पास हुए विधेयकों को राष्ट्रपति और राज्यपाल की मंज़ूरी के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की थी।
एयर इंडिया ने घोषणा की है कि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात के बीच अधिक…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का स्वागत किया, जो भारत…
पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के कारण फंसे यात्रियों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए…
आईसीसी टी20 क्रिकेट विश्व कप का पहला सेमीफाइनल आज शाम दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के…
रंगों का त्योहार होली, आज पूरे देश में मनाई जा रही है। यह पर्व वसंत…
भारतीय जनता पार्टी ने छह राज्यों में होने वाले 2026 के राज्यसभा द्विवार्षिक चुनावों के…