सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुफ्त योजनाओं की संस्कृति से देश के आर्थिक विकास में बाधा आ रही है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉय माल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचौली की पीठ ने कहा कि देश के अधिकांश राज्य राजस्व घाटे में हैं, फिर भी विकास की अनदेखी करते हुए वे इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं। न्यायालय ने तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव किया गया था। पीठ ने कहा कि राज्यों को मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली देने के बजाय रोजगार सृजन पर काम करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह से मुफ्त की योजनाएं शुरू करने से कोई कार्य करना नहीं चाहेगा।
भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का भव्य उद्घाटन समारोह दुनिया भर…
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में स्विस कन्फेडरेशन के अध्यक्ष…
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पारस्परिक सम्मान और सहयोग भावना से समुद्र…
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर खुद से संज्ञान लिया है, जिसमें…
आईसीसी टी-ट्वेंटी क्रिकेट विश्व कप के सुपर 8 चरण के मुकाबले हो तय हो गये…
बिहार अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो गया है। राज्य के अंतिम हथियारबंद माओवादी…