आज अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है – चाय की उपयोगिता को बनाए रखना, समुदायों का समर्थन करना। इस दिवस का उद्देश्य मेहनती चाय श्रमिकों को उनका हक दिलाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।
भारत के हर घर की रसोई से लेकर नुक्कड़ की टपरी तक चाय हमारी रग–रग में बसती है। तभी तो किसी शायर ने क्या खूब लिखा है-“तमाम शिकवे–गिले भुला देती है, ये चाय है जनाब, मुर्दों को भी जगा देती है। रिश्तों में जब भी थोड़ी कड़वाहट आने लगे, बस एक कप चाय… महफ़िलें जमा देती है! “चाहे वो सिरदर्द को मिनटों में गायब करने वाली कड़क मसाला चाय हो– या फिर आज के फिटनेस फ्रीक युवाओं की पहली पसंद, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ज़ायकेदार ग्रीन–टी! असम के हरे–भरे मैदानों से लेकर दार्जिलिंग और नीलगिरी की खूबसूरत पहाड़ियों तक… लाखों चाय श्रमिक दिन–रात कड़ी धूप और बारिश में पसीना बहाते हैं। तब जाकर चाय की ये पत्तियाँ हमारी रसोई तक पहुँचती हैं।
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