भारत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में दवा प्रतिरोधी टीबी के लिए नई छोटी और अधिक प्रभावी उपचार पद्धति शुरू करने को मंजूरी दी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत बहु-दवा प्रतिरोधी टीबी (एमडीआर-टीबी) के लिए एक अत्यधिक प्रभावी और कम समय के उपचार विकल्प के रूप में बीपीएएलएम पद्धति शुरू करने को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरुप, सतत विकास लक्ष्यों के तहत, बीमारी को 2025 तक यानी वैश्विक लक्ष्य से पांच साल पहले, देश को टीबी से मुक्त करना है। इस उपचार पद्धति में एक नई टीबी रोधी दवा प्रीटोमैनिड शामिल है, जिसे बेडाक्विलाइन और लाइनजोलिड (मोक्सीफ्लोक्सासिन सहित/बिना) के साथ मिलाया गया है। प्रीटोमैनिड को पहले ही भारत में उपयोग के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा अनुमोदित किए जाने के साथ ही लाइसेंस भी दिया जा चुका है।

बीपीएएलएम उपचार पद्धति में चार दवाओं – बेडाक्विलाइन, प्रीटोमैनिड, लाइनजोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन का संयोजन है। यह उपचार पद्धति पिछली एमडीआर-टीबी उपचार प्रक्रिया की तुलना में सुरक्षित, अधिक प्रभावी और उपचार का तेज विकल्प साबित हुई है। पारंपरिक एमडीआर-टीबी उपचार गंभीर दुष्प्रभावों के साथ 20 महीने तक चलते हैं। जबकि, बीपीएएलएम उपचार पद्धति दवा प्रतिरोधी टीबी को केवल छह महीने में ठीक कर सकती है और उपचार की सफलता दर भी उच्च है। भारत के 75,000 दवा प्रतिरोधी टीबी रोगी अब इस छोटी अवधि की उपचार पद्धति का लाभ उठा सकेंगे। अन्य लाभों के साथ, लागत में कुल मिलाकर बचत होगी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के परामर्श से टीबी के इस नए उपचार व्यवस्था का सत्यापन सुनिश्चित किया, जिसमें देश के विषय विशेषज्ञों द्वारा साक्ष्यों की गहन समीक्षा की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि एमडीआर-टीबी उपचार विकल्प सुरक्षित और किफायती है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के माध्यम से एक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन भी कराया गया है।

भारत सरकार के इस कदम से टीबी को समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में देश की प्रगति को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी प्रभाग द्वारा बीपीएएलएम पद्धति की एक देशव्यापी समयबद्ध रोल आउट योजना तैयार की जा रही है, जिसमें नई पद्धति के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों का कठोर क्षमता निर्माण शामिल है।

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