केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा लागू किए गए कई अहम रणनीतिक सुधारों की घोषणा की, जिनका उद्देश्य भारत के टेलीकॉम सुरक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करना और साथ ही उद्योग पर अनुपालन (कंप्लायंस) का बोझ कम करना है। ये सुधार नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी (एनसीसीएस) के माध्यम से लागू किए गए हैं और आत्मनिर्भर भारत के विज़न तथा “डिज़ाइन इन इंडिया, सॉल्व इन इंडिया, स्केल फॉर द वर्ल्ड” के सिद्धांतों के अनुरूप हैं। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने वर्ष 2026 के लिए तीन प्रमुख पहलों की घोषणा की, जिनका मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना और टेलीकॉम उद्योग के लिए एक मजबूत व अनुकूल वातावरण तैयार करना है। इन ऐतिहासिक घोषणाओं में प्रो टेम सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन स्कीम का रणनीतिक विस्तार, टेलीकॉम सिक्योरिटी टेस्टिंग लैबोरेट्री (टीएसटीएल) के आवेदन शुल्क में काफी कमी, और ऑप्टिकल नेटवर्क टर्मिनेटर (ओएनटी) उपकरणों के लिए सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं को सरल बनाना शामिल है। ये सभी कदम मिलकर आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिनका उद्देश्य अनुपालन बोझ को घटाना और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देना है।
दूरसंचार विभाग ने प्रो टेम सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन स्कीम को 01-01-2026 से दो साल के लिए बढ़ाया
भारत सरकार के टेलीकम्युनिकेशन विभाग (डीओटी) ने अपने नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी (एनसीसीएस) के ज़रिए प्रो टेम सर्टिफिकेशन स्कीम को 01-01-2026 के बाद भी निरंतर आधार पर दो वर्षों के लिए बढ़ा दिया है।
प्रो टेम सर्टिफिकेशन स्कीम को अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था, ताकि आईपी राउटर और वाई-फाई सीपीई उत्पादों से जुड़े उद्योग को व्यापारिक प्रक्रियाओं में किसी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े। दरअसल, 01-10-2024 से इन उत्पादों के लिए सुरक्षा प्रमाणन अनिवार्य होना था। यह योजना 31-12-2025 तक वैध थी और इसके बाद समीक्षा प्रस्तावित थी। प्रो टेम सर्टिफिकेशन के तहत, ओईएम (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) एक अनुरूपता घोषणा जमा करते हैं, जिसमें यह बताया जाता है कि उनका उपकरण भारतीय दूरसंचार सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं (आईटीएसएआर) के अनुसार लागू आईपी राउटर और वाई-फाई सीपीई उत्पादों से जुड़ी अधिकांश सुरक्षा शर्तों का पालन करता है। इसके साथ ही, उपकरण को परीक्षण के लिए टेलीकॉम सिक्योरिटी टेस्टिंग लैब (टीएसटीएल) में भेजा जाता है। ओईएम एक अंडरटेकिंग भी जमा करते हैं, जिसमें वे यह आश्वासन देते हैं कि परीक्षण के दौरान यदि कोई कमी पाई जाती है, तो प्रमाणपत्र की वैधता अवधि के भीतर उसे दूर कर लिया जाएगा।
अब तक दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी (एनसीसीएस) के माध्यम से कुल 107 प्रो टेम सर्टिफिकेट जारी किए हैं। इन प्रमाणपत्रों की वजह से ओईएम (OEMs) के व्यापारिक कार्यों में बिना किसी रुकावट के निरंतरता बनी रही है। प्रो टेम सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन स्कीम को दो और वर्षों के लिए बढ़ाए जाने से उद्योग पर नए उत्पादों के लॉन्च और मौजूदा उत्पादों की तैनाती से जुड़ी कड़े समय-सीमाओं का दबाव काफी कम होगा। इससे पहले 05-12-2025 को प्रो टेम सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन की वैधता अवधि को 6 महीने से बढ़ाकर 2 वर्ष कर दिया गया था। इससे ओईएम को सुरक्षा प्रमाणन परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक दो साल तक अपने उत्पादों की श्रृंखला (प्रोडक्ट लाइन) की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिली है।
टीएसटीएल नामांकन आवेदन शुल्क में कटौती
दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी (एनसीसीएस) के माध्यम से भारत के टेलीकॉम सुरक्षा परीक्षण इकोसिस्टम को मजबूत करने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने और टेलीकॉम सुरक्षा आश्वासन में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए एक अहम नीतिगत कदम उठाया है।
एनसीसीएस ने टेलीकॉम सिक्योरिटी टेस्टिंग लेबोरेटरी (टीएसटीएल) के नामांकन के लिए आवेदन शुल्क में 50 प्रतिशत से अधिक की बड़ी कटौती की अधिसूचना जारी की है।
टेलीकॉम सिक्योरिटी टेस्टिंग लेबोरेटरी (टीएसटीएल) वे प्रयोगशालाएं होती हैं, जिन्हें भारतीय दूरसंचार सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं (आीटीएसएआर) और टेस्ट शेड्यूल एवं टेस्ट प्रोसीजर (टीएसटीपी) के अनुरूप टेलीकॉम उपकरणों की जांच के लिए नामित किया जाता है। वर्तमान में एनसीसीएस ने देशभर में इस उद्देश्य के लिए 9 टीएसटीएल नामित किए हैं, जो 27 प्रकार के टेलीकॉम उपकरणों और नेटवर्क फंक्शन्स को कवर करते हैं।
टेलीकॉम सुरक्षा परीक्षण इकोसिस्टम में अनुपालन लागत को कम करने और व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए बहु-आयामी कदमों के तहत, एनसीसीएस ने टीएसटीएल नामांकन के लिए लिए जाने वाले आवेदन शुल्क की संरचना में 50 प्रतिशत से अधिक की कटौती की है।
संशोधित टीएसटीएल पदनाम आवेदन शुल्क संरचना की मुख्य विशेषताएं:
इन उपायों से टीएसटीएल इकोसिस्टम का विस्तार होने, दूरसंचार सुरक्षा परीक्षण क्षमता में सुधार होने और भारत में सुरक्षित दूरसंचार उत्पादों के लिए बाजार में आने का समय कम होने की उम्मीद है।
इन सुधारों के प्रमुख नीतिगत सहायक कारक और रणनीतिक प्रभाव इस प्रकार होंगे:
· राष्ट्रीय टेलीकॉम सुरक्षा परीक्षण इकोसिस्टम को मजबूत करना।
· निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
अधिक जानकारी के लिए कृपया राष्ट्रीय संचार सुरक्षा केंद्र (एनसीसीएस) की वेबसाइट www.nccs.gov.in पर जाएं ।
जुलाई 2025 में दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने टेलीकॉम और आईसीटी उत्पादों के लिए सुरक्षा परीक्षण मूल्यांकन शुल्क में 95% तक की बड़ी कटौती की घोषणा की थी। इसके साथ ही डीओटी ने हाईली स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट (एचएसई) और एंड-ऑफ-सेल / एंड-ऑफ-लाइफ टेलीकॉम उत्पादों के लिए सुरक्षा परीक्षण और अनुपालन प्रक्रिया को भी सरल बनाया। ये कदम टेलीकॉम/आईसीटी क्षेत्र में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने के सरकार के संकल्प को दर्शाते हैं।
3.डीओटी ने ऑप्टिकल नेटवर्क टर्मिनेटर (ओएनटी) डिवाइस के इंडियन टेलीकॉम सिक्योरिटी एश्योरेंस रिक्वायरमेंट (आईटीएसएआर) सर्टिफिकेशन को आसान बनाया
उद्योग में कारोबार की निरंतरता सुनिश्चित करने और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को और मजबूत करने के उद्देश्य से भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने अपने नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी (एनसीसीएस) के माध्यम से आईटीएसएआर सुरक्षा सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को सरल बनाया है। इसके तहत अब ओएनटी डिवाइस के कस्टमाइज़्ड वेरिएंट्स के एक समूह को एक ही सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के तहत टेस्ट किया जाएगा।
ग्राहकों के परिसर में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए इस्तेमाल होने वाले ओएनटी डिवाइस के लिए आईटीएसएआर को 24 नवंबर 2023 को अधिसूचित किया गया था। इसकी सुरक्षा सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को 1 अगस्त 2024 से स्वैच्छिक और 1 जनवरी 2026 से अनिवार्य किया गया है। चिपसेट विक्रेताओं द्वारा अपनाई गई कंपाइलेशन प्रक्रिया के कारण, एक ही सॉफ्टवेयर वर्ज़न होने के बावजूद इन ओएनटी वेरिएंट्स के हैश वैल्यू अलग-अलग होती थीं। इस वजह से हर वेरिएंट के लिए अलग-अलग सर्टिफिकेशन जरूरी हो जाता था, जिससे सुरक्षा सर्टिफिकेशन की लागत काफी बढ़ गई और उद्योग की ओर से बड़ी संख्या में राहत की मांग की गई। उद्योग प्रतिनिधियों से परामर्श और सुझावों के आधार पर एनसीसीएस ने ऐसा तंत्र विकसित किया है, जिससे आईटीएसएआर अनुपालन का बोझ कम होगा और टेस्टिंग मामलों की संख्या लगभग 10 गुना तक घट जाएगी। इससे सुरक्षा परीक्षण की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और उद्योग को काफी वित्तीय राहत मिलेगी।
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