केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आज शहरी स्वच्छता के लिए दुनिया के सबसे बड़े सर्वे ‘स्वच्छ सर्वेक्षण (SS)’ के 9वें संस्करण की टूलकिट को एक नए अवतार में लॉन्च किया। इस नई स्वच्छ सर्वेक्षण टूलकिट को सरल, तेज, व्यवस्थित और सर्वसमावेशी रखा गया है। टूलकिट लॉन्च के इस कार्यक्रम में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव एस. कटिकिथला भी मौजूद रहे। इस अवसर पर एसबीएम-यू की संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक, रूपा मिश्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, शहरी विकास के प्रमुख सचिव, राज्य मिशन निदेशक, नगर निगम आयुक्त, विभिन्न राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारी उपस्थित रहे।
2016 में MoHUA द्वारा शुरू किया गया यह स्वच्छ सर्वेक्षण नागरिक भागीदारी और थर्ड पार्टी द्वारा सत्यापन के माध्यम से शहरी स्वच्छता में सुधार लाने का काम करता है। वर्ष 2024 के लिए एक विशेष श्रेणी – ‘सुपर स्वच्छ लीग’ शुरू की गई है, जो स्वच्छता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शहरों की एक अलग लीग रहेगी। पिछले 3 वर्षों (2021-2023) में कम से कम 2 वर्षों के दौरान शीर्ष 3 स्थानों पर रहने वाले शहरों को इसमें जगह मिली है। सुपर स्वच्छ लीग में 12 शहर हैं। प्रत्येक जनसंख्या श्रेणी में शीर्ष 3 रैंकिंग वाले शहर अगले वर्षों के लिए लीग में शामिल हो जाएंगे। इस लीग में शामिल यूएलबी का मूल्यांकन अतिरिक्त आकांक्षात्मक संकेतकों के आधार पर किया जाएगा और उन्हें अपना स्थान बनाए रखने के लिए 85% या उससे अधिक का स्कोर बनाए रखना होगा।
नई स्वच्छ सर्वेक्षण टूलकिट के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, “स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों के असाधारण प्रदर्शन को मान्यता देने के लिए, हम ‘सुपर स्वच्छ लीग’ शुरू कर रहे हैं, जो सबसे स्वच्छ शहरों के बीच एक प्रतियोगिता है। यह स्वच्छता के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है और हमारे निरंतर हो रहे नवाचार स्वच्छ भारत मिशन को 10 साल बाद भी वैश्विक स्तर पर सफल बनाए रखता है। हमारा ध्यान साल दर साल गुणवत्ता में सुधार लाने पर है, सरल किए गए मूल्यांकन मापदंडों के साथ जो यूएलबी की ओर से स्पष्ट डेटा सुनिश्चित करते हैं और पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखते हैं। यह दृष्टिकोण मिशन की प्रतिष्ठा को मजबूत करता है और शहरी स्वच्छता की दिशा में हो रही प्रगति को आगे बढ़ाता है।
स्वच्छ सर्वेक्षण के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव एस. कटिकिथला ने कहा, “स्वच्छ सर्वेक्षण सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी का एक उल्लेखनीय प्रमाण है, जो स्वच्छता को जीवन का एक तरीका बनाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस वर्ष के सर्वेक्षण में सुपर स्वच्छ लीग की शुरूआत दोहरे उद्देश्यों को पूरा करती है: यह शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहरों को उच्च आकांक्षा मानकों के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है, साथ ही अन्य शहरों को सुधार करने और शीर्ष रैंक हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।”
इस वर्ष पहली बार शहरों को जनसंख्या पर आधारित 5 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: इनमें Very Small (बहुत छोटा), Small (छोटा), Medium (मध्यम वर्गीय), Big (बड़ा) और Millon-Plus (दस लाख से अधिक) आबादी वाली श्रेणी के शहर शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी का मूल्यांकन जनसंख्या, उसके विशिष्ट आकार और आवश्यकताओं के अनुरूप मापदंडों के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी में स्वच्छ शहरों को पुरस्कार दिए जाएंगे। इस तरह नया स्वच्छ सर्वेक्षण समावेशी हो गया है। इंदौर और सूरत जैसे स्वच्छता के क्षेत्र में दिग्गज रहने वाले शहरों के साथ-साथ छोटे शहर भी अपनी उत्कृष्टता का प्रदर्शन कर सकेंगे।
इस वर्ष, स्वच्छता लक्षित इकाइयों (CTUs) और ‘स्वभाव स्वच्छता संस्कार स्वच्छता’ को अपनाना – दैनिक जीवन में व्यवहार परिवर्तन को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया है। मूल्यांकन मुख्य मापदंडों जैसे कि चुनौतीपूर्ण कचरा स्थल और ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करना, नजर आने वाली स्वच्छता, आरआरआर केंद्रों इत्यादि की ओर ध्यान केंद्रित करेगा। शैक्षणिक संस्थानों में स्वच्छता संबंधी मूल्यों को बढ़ावा देने और युवा पीढ़ी को स्वच्छता और स्थायी व्यवस्थाएं अपनाने को प्रेरित करने के लिए, इस वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण के एक हिस्से के रूप में स्कूलों का मूल्यांकन भी शुरू किया गया है। अधिक आवागमन वाले पर्यटन स्थलों पर भी दृश्यमान स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की ओर विशेष ध्यान दिया गया है।
एक नए ढांचे में व्यवस्थित नई स्वच्छ सर्वेक्षण टूलकिट में सभी संकेतकों को 10 बकेट में बांटा गया है, जिसमें शहरी स्थानीय निकायों की बेहतर समझ के लिए मूल्यांकन मापदंडों को सरल बनाया गया है। ये हैं: – i) दृश्यमान स्वच्छता ii) कचरे का पृथक्करण, संग्रह और परिवहन iii) ठोस अपशिष्ट प्रबंधन iv) स्वच्छता तक पहुंच v) उपयोग किए गए जल का प्रबंधन vi) डीस्लजिंग सेवाओं का मशीनीकरण vii) स्वच्छता को बढ़ावा देना viii) पारिस्थितिकी तंत्र और संस्थागत मापदंडों को मजबूत करना ix) सफाई कर्मचारियों का समग्र कल्याण x) नागरिक प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण। इसके अतिरिक्त, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी की जाएगी ताकि निर्धारित समय पर और प्रभावी तौर पर आधारशिला रखी जा सके। डेटा की सटीकता की पुष्टि करने और यूएलबी से प्राप्त इनपुट को ट्रैक करने के बाद, यदि डेटा में कोई विसंगति मिलती है तो इस तरह के मामले में सख्त पैनल्टी लगाई जाएगी।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने व्यापक उपाय लागू किए हैं, जिनमें ऑन-फील्ड टीमों के लिए प्रशिक्षण, औचक क्षेत्र निरीक्षण, नॉन-रेजिडेंट शहरी मूल्यांकनकर्ताओं का उपयोग, साक्ष्यों की गुणवत्ता संबंधी जांच के दो स्तर, मूल्यांकनकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, यूएलबी के लिए शिकायत निवारण तंत्र, एक समर्पित मूल्यांकनकर्ता निगरानी सेल और स्वच्छतम पोर्टल के माध्यम से आईटी आधार शामिल हैं।
9वें संस्करण के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण-क्षेत्र मूल्यांकन का अंतिम चरण 15 फरवरी 2025 को शुरू होगा और मार्च 2025 के अंत तक पूरा हो जाएगा।
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