केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच)की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा की गई। इस बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा भी मौजूद रहे।
बैठक का मुख्य विषय “सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में कमी लाने के उपाय” रहा, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और जान बचाने के लिए बहु-आयामी एवं समन्वित दृष्टिकोण पर बल दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अध्यक्ष ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा बढ़ाने और दुर्घटनाएं कम करने के लिए मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी समिति को दी।
इसके बाद अवर सचिव (परिवहन) द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें सड़क सुरक्षा के चार स्तंभों-इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन देखभाल के तहत प्रमुख पहलों को रेखांकित किया गया। प्रस्तुति में अब तक की उपलब्धियों, मौजूदा चुनौतियों तथा वर्तमान उपायों को सुदृढ़ करने और नई सड़क सुरक्षा पहलों को शुरू करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से विकसित की जा रही एआई-सक्षम सड़क सुरक्षा तकनीकों की प्रगति से भी समिति को अवगत कराया।
मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों की तारीफ करते हुए समिति के सदस्यों ने देशभर में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की लगातार बढ़ रही संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने इंजीनियरिंग सुधारों, जन-जागरूकता बढ़ाने और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र सहित एक समग्र रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सदस्यों ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के सुधार, चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों के चौड़ीकरण, राजमार्गों पर ट्रॉमा केयर सुविधाओं की उपलब्धता, सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए मुआवजा बढ़ाने, सड़क रखरखाव और मरम्मत तथा राज्य राजमार्गों के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय जैसे प्रमुख मुद्दे उठाए। जिला स्तर पर सांसद सड़क सुरक्षा समिति (एमपीआरएससी) की बैठकों के अनियमित आयोजन, उचित सड़क चिन्हों की कमी तथा साइनबोर्ड और रिफ्लेक्टर की खराब गुणवत्ता पर भी चिंता जताई गई। यह भी सुझाव दिया गया कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की तर्ज पर की जाए और वहां उपयुक्त सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। अन्य सुझावों में स्कूल पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा को शामिल करना, सड़क सुरक्षा के लिए एक केंद्र की स्थापना तथा प्रत्येक जिले में कम से कम एक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करना शामिल रहा।
इन चिंताओं का जवाब देते हुए नितिन गडकरी ने समिति को बताया कि दूरसंचार विभाग द्वारा वाहन-से-वाहन संचार प्रणालियों के विकास के लिए 30 गीगाहर्ट्ज़ रेडियो फ्रीक्वेंसी आवंटित की गई है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में कमी आएगी। उन्होंने सदस्यों से अपने-अपने जिलों में जिला कलेक्टर, पुलिस, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और अन्य संबंधित एजेंसियों की भागीदारी के साथ नियमित रूप से एमपीआरएससी बैठकों के आयोजन के महत्व पर राज्य अधिकारियों को जागरूक करने का आग्रह किया।
नितिन गडकरी ने आगे कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अंतिम रूप देते समय सड़क सुरक्षा के पहलुओं को समुचित रूप से शामिल किया जा रहा है। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय/भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारियों और परियोजना निदेशकों को नियमित रूप से संसद सदस्य सड़क सुरक्षा समिति (एमपीआरएससी) बैठकों में भाग लेने और चालू परियोजनाओं में उपयुक्त सड़क सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि एआई-आधारित सड़क सुरक्षा अनुप्रयोग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किए जाएंगे तथा सदस्यों से अपनी चिंताओं और सुझावों पर विस्तृत नोट प्रस्तुत करने का अनुरोध किया।
बैठक के दौरान मंत्री ने सड़क सुरक्षा गीत (रोड सेफ्टी एंथम) भी प्रस्तुत किया, जिसका 22 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उन्होंने सांसदों से स्कूलों, सार्वजनिक आयोजनों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर क्षेत्रीय भाषाओं में सड़क सुरक्षा गीत के प्रसारण को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया।
केंद्रीय मंत्री ने सभी अधिकारियों को देश भर में सुरक्षित सड़क बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में समर्पित प्रयास जारी रखने के लिए प्रेरित किया और भारतीय सड़कों पर जान बचाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
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