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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) का लाभ उठाने का आग्रह किया

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज उद्योग जगत के नेताओं से भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के अंतर्गत उत्पन्न अवसरों का पूर्ण लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने चार ईएफटीए देशों द्वारा किए गए 100 अरब डॉलर के कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रतिबद्धता और भारत में 10 लाख रोजगार सृजित करने की क्षमता पर प्रकाश डाला।

पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एसोचैम द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौते की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित सत्र को संबोधित किया। पीयूष गोयल ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण अवसर और यूरोप के साथ भारत के संबंधों में एक प्रमुख मील का पत्थर बताया।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-ईएफटीए टीईपीए ने यूरोप के साथ भारत के मजबूत आर्थिक संबंधों की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि ईएफटीए समझौते के समापन के बाद, भारत ने ब्रिटेन के साथ सफलतापूर्वक समझौता किया और बाद में 27 देशों के यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया, जिसे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मदर ऑफ ऑल डील यानी “सभी समझौतों की जननी” बताया।

पीयूष गोयल ने भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के समर्थन में हुई तीव्र प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लंदन स्थित भारतीय राजनयिक दल के नेतृत्व में यह समझौता ब्रिटेन की संसद द्वारा सबसे तेजी से अनुमोदित होने वाले व्यापार समझौतों में से एक बन सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान 24 जुलाई को चेकर में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे और उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह समझौता शीघ्र ही लागू हो जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने उद्योग संघों से “समझौते से क्रियान्वयन” की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार समझौते तभी सार्थक होते हैं जब उनसे व्यापार प्रवाह, निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी में वृद्धि हो।

पीयूष गोयल ने स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड से प्राप्त 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए इसे वैश्विक व्यापार वार्ताओं में एक अभूतपूर्व उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन या वैश्विक व्यापार समझौतों के इतिहास में पहले कभी भी किसी मुक्त व्यापार समझौते को कानूनी रूप से बाध्यकारी निवेश प्रतिबद्धता के साथ नहीं जोड़ा गया था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबद्धता केवल एक घोषणा या समझौता ज्ञापन नहीं है, बल्कि समझौते के तहत एक कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रावधान है। उन्होंने आगे कहा कि इस निवेश प्रतिबद्धता में भारत के पारिस्थितिकी तंत्र में दस लाख नौकरियों का सृजन भी शामिल है।

पीयूष गोयल ने यह भी बताया कि समझौते में एक सुरक्षा खंड शामिल है जिसके तहत यदि निवेश प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया जाता है तो भारत मुक्त व्यापार समझौते के तहत दिए गए लाभों को वापस ले सकता है। यह प्रावधान वैश्विक स्तर पर पहले के किसी भी व्यापार समझौते में नहीं देखा गया है।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत द्वारा इस मॉडल को पेश करने के बाद अन्य देशों ने भी इसी तरह के ढांचे अपनाने का प्रयास शुरू कर दिया है, लेकिन कोई भी देश इस तरह की कानूनी रूप से बाध्यकारी निवेश प्रतिबद्धताओं को हासिल करने में सक्षम नहीं हो पाया है।

प्रगति के शुरुआती संकेतों पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आइसलैंड ने महाराष्ट्र के मत्स्य पालन क्षेत्र में 30 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ एक छोटी सी शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की शुरुआत हल्की बारिश से होती है और आशा व्यक्त की कि ये प्रारंभिक निवेश भारत में निवेश के बड़े और महत्वपूर्ण प्रयासों में तब्दील होंगे।

उन्होंने टीईपीए को व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश को समाहित करने वाला एक व्यापक समझौता बताया, जो विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर खोलता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से सेवा क्षेत्र में भी काफी अवसर खुले हैं और इसने चारों ईएफटीए देशों में लगभग 100 प्रतिशत बाजार पहुंच प्रदान की है।

पीयूष गोयल ने एसोचैम के सदस्यों और सेवा क्षेत्र के व्यवसायों को समझौते के तहत प्रदान किए गए अवसरों का सक्रिय रूप से लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह ढांचा प्रौद्योगिकी सहयोग, क्षमता निर्माण और यूरोपीय व्यवसायों के साथ गहन साझेदारी के अवसर प्रदान करता है।

साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने एफटीए पर बातचीत करते समय भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की सावधानीपूर्वक सुरक्षा की है। उन्होंने दोहराया कि कृषि और अन्य संवेदनशील उद्योगों जैसे क्षेत्रों को संरक्षित किया गया है और उन क्षेत्रों में रियायतें नहीं दी गई हैं जहां वे घरेलू हितधारकों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने सभी व्यापार समझौतों में किसानों, मछुआरों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के हितों की निरंतर रक्षा की है। दुग्ध उत्पादन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित रखा गया है और आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) उत्पादों को कोई रियायत या बाजार पहुंच प्रदान नहीं की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन का हवाला देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-ईएफटीए टीईपीए साझा समृद्धि और भागीदार देशों के बीच एक मजबूत और अधिक समावेशी साझेदारी के निर्माण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने एसोचैम से उसके पदाधिकारियों के नेतृत्व में, देश के जमीनी स्तर के व्यवसायों तक एफटीए का संदेश और इसके लाभों को पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह संगठन हजारों संघों और लाखों उद्यमों का प्रतिनिधित्व करता है और भारतीय उत्पादकों और सेवा प्रदाताओं को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने एसोचैम से महिला उद्यमियों, युवाओं, किसानों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, समुद्री खाद्य निर्यातकों, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, एमएसएमई और सेवा क्षेत्र के पेशेवरों को समझौते के माध्यम से सृजित हुए अवसरों से जोड़ने का आग्रह किया।

उन्होंने वास्तुकारों, चार्टर्ड अकाउंटेंटों, नर्सों, इंजीनियरों, आईटी और व्यावसायिक सेवा पेशेवरों, ऑडियोविजुअल सेवा प्रदाताओं, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों सहित पेशेवरों और सेवा प्रदाताओं के लिए उपलब्ध अवसरों पर भी प्रकाश डाला।

पीयूष गोयल ने प्रतिभागियों को सूचित किया कि भारत के व्यापार समझौतों के तहत अवसरों का पता लगाने के इच्छुक व्यवसायों की सुविधा के लिए पश्चिम भारत में एक एफटीए डेस्क बनाया गया है। यह डेस्क भारतीय कंपनियों को एफटीए भागीदार देशों के व्यवसायों से जोड़ने और सहयोग के अवसरों की पहचान करने में सहायता करेगा।

उन्होंने एसोचैम को भारतीय कंपनियों और चार ईएफटीए देशों के व्यवसायों के बीच एक सेतु की भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीईपीए भारत की आर्थिक विकास गाथा को आगे बढ़ाने वाला एक ऐतिहासिक समझौता बन जाए।

वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों और संघर्षों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया वर्तमान में कई अनिश्चितताओं का सामना कर रही है, लेकिन उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये चुनौतियां टल जाएंगी और विकास के नए अवसर उभरेंगे।

अपने संबोधन के समापन में पीयूष गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय व्यापार समझौते से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाकर भारतीय व्यवसायों का विकास होगा, विस्तार होगा और वे महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त करेंगे।

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