केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के तहत सात अतिरिक्त उपायों का शुभारंभ किया। ईपीएम वाणिज्य विभाग की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों के लिए सशक्त बनाना है। इन उपायों का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना, व्यापक और समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना है। इस अवसर पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी उपस्थित थे।
पीयूष गोयल ने विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के लिए समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समावेशी विकास, वंचित लोगों का सशक्तिकरण और भारत के त्वरित गति से हुए रूपांतरण में पीछे छूट गए लोगों को अवसर प्रदान करना सच्चे सामाजिक न्याय की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।
पीयूष गोयल ने उभरती प्रौद्योगिकियों और वैश्विक साझेदारियों में भारत के बढ़ते नेतृत्व को रेखांकित किया। हाल ही में संपन्न हुए एआई समिट का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और संबंधित मंत्रियों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की प्रौद्योगिकियों पर वैश्विक चर्चाओं के केंद्र में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और स्वदेशी व्यापक भाषा मॉडल में प्रगति से भारत के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर खुलेंगे और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
पीयूष गोयल ने इस बात पर बल दिया कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क ने भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच को अत्यधिक बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि नौ संपन्न एफटीए के माध्यम से, जिनमें अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण भी शामिल है, भारत अब वैश्विक जीडीपी के लगभग 70 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के दो-तिहाई हिस्से तक पहुंच सकता है। ये समझौते 38 विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विभिन्न क्षेत्रों में वरीयतापूर्ण पहुंच प्रदान करते हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आज विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ आत्मविश्वास से जुड़ा हुआ है, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करते हुए प्रतिस्पर्धात्मक रूप से सुदृढ़ क्षेत्रों में लाभ प्राप्त कर रहा है। 2022 से भारत ने व्यापारिक कार्यकलापों को गति दी है, वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों में साझेदारी का विस्तार किया है, अनुपालन संबंधी बोझ कम किया है, कई कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया है और व्यापार करने में सुगमता को बेहतर बनाया है। उन्होंने कई शहरों में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन की भारत की सफल मेजबानी का भी उल्लेख किया, जिससे देश की विविधता और आर्थिक क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
पीयूष गोयल ने कहा कि वैश्विक व्यापार के लाभ प्रत्येक लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप और उद्यमी तक पहुंचने चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्यात प्रोत्साहन मिशन का उद्देश्य नए उत्पादों, सेवाओं और निर्यातकों को बढ़ावा देना है, साथ ही भारतीय व्यवसायों को नए बाजारों तक पहुंच प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि फरवरी के पहले पखवाड़े में भारत ने वस्तु निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की है, जो सुदृढ़ बाजार विश्वास और उद्योग की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि इस मिशन का उद्देश्य लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना, ऋण तक पहुंच को सुदृढ़ करना, गुणवत्ता मानकों को बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन में सहयोग देना और वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार करना है। दुबई में भारत मार्ट सहित विदेशी वेयरहाउसिंग जैसी पहलों का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को जीसीसी, अफ्रीका, मध्य एशिया और यूरोप के बाजारों तक कार्यनीतिक पहुंच प्रदान करना है।
निर्यात संवर्धन मिशन ‘निर्यात प्रोत्साहन’ के तहत वित्तीय सहायता और ‘निर्यात दिशा’ के तहत व्यापार इकोसिस्टम सहायता को मिलाकर एक समग्र इकोसिस्टम दृष्टिकोण अपनाता है, जिसे एक एकीकृत और डिजिटल रूप से निगरानी किए गए ढांचे के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
इस मिशन का कार्यान्वयन वाणिज्य विभाग द्वारा लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, एक्जिम बैंक, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई), राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी), विनियमित ऋण संस्थानों, विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों, ईपीसी और उद्योग हितधारकों के समन्वय से किया जाता है।
हाल ही में आरंभ किए गए उपायों का उद्देश्य लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा सामना की जाने वाली संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना है, जिनमें पूंजी की उच्च लागत, विविध व्यापार वित्त साधनों तक सीमित पहुंच, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनुपालन का बोझ, लॉजिस्टिक संबंधी कमियां और बाजार में प्रवेश की बाधाएं शामिल हैं।
निर्यात प्रोत्साहन के तहत शुरू की गई युक्तियों में शामिल हैं:
1. वैकल्पिक व्यापार साधनों (निर्यात फैक्टरिंग) के लिए सहायता – यह उपाय लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए किफायती कार्यशील पूंजी समाधान के रूप में निर्यात फैक्टरिंग को बढ़ावा देता है। आरबीआई/आईएफएससीए द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से किए गए पात्र लेनदेन पर फैक्टरिंग लागत पर 2.75 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सहायता की अधिकतम सीमा प्रति एमएसएमई 50 लाख रुपये सालाना है और पारदर्शिता और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए इसे डिजिटल दावा तंत्र के माध्यम से संसाधित किया जाएगा।
2. ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता – डिजिटल चैनलों का उपयोग करने वाले निर्यातकों को सहयोग देने के लिए, ब्याज सब्सिडी और आंशिक ऋण गारंटी के साथ संरचित ऋण सुविधाएं आरंभ की जा रही हैं। डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ 50 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। ओवरसीज इन्वेंटरी क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 75 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ 5 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति आवेदक 15 लाख रुपये की वार्षिक सीमा के अधीन, 2.75 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी उपलब्ध होगी।
3. उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता- यह उपाय निर्यातकों को विभिन्न साझा जोखिम और ऋण साधनों के माध्यम से नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों तक पहुंच बनाने में सक्षम बनाता है। इन संरचित तंत्रों का उद्देश्य निर्यातकों के आत्मविश्वास और तरलता प्रवाह को सुदृढ़ करना है।
इसके अतिरिक्त, निर्यात दिशा के अंतर्गत निम्नलिखित उपाय आरंभ किए गए:
1. व्यापार विनियम, प्रत्यायन एवं अनुपालन सक्षमीकरण (टीआरएसीई)- टीआरएसीई निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण, निरीक्षण, प्रमाणन और अन्य अनुरूपता आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है। पात्र परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन व्यय के लिए सकारात्मक सूची के अंतर्गत 60 प्रतिशत और प्राथमिकता सकारात्मक सूची के अंतर्गत 75 प्रतिशत की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जो प्रति आईईसी 25 लाख रुपये की वार्षिक सीमा के अधीन है।
2. लॉजिस्टिक्स, ओवरसीज वेयरहाउसिंग एंड फुलफिलमेंट की सुविधा प्रदान करना (एफएलओडब्ल्यू) – एफएलओडब्ल्यू निर्यातकों को ओवरसीज वेयरहाउसिंग और फुलफिलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच बनाने में सहायता करता है, जिसमें वैश्विक वितरण नेटवर्क से जुड़े ई-कॉमर्स निर्यात हब शामिल हैं। स्वीकृत परियोजना लागत के 30 प्रतिशत तक की सहायता अधिकतम तीन वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी, जो निर्धारित सीमाओं और एमएसएमई भागीदारी मानदंडों के अधीन है।
3. माल ढुलाई एवं परिवहन हेतु लॉजिस्टिक्स उपाय (एलआईएफटी) – एलआईएफटी निम्न निर्यात तीव्रता वाले जिलों में निर्यातकों द्वारा सामना की जाने वाली भौगोलिक कठिनाइयों को कम करता है। पात्र माल ढुलाई व्यय के 30 प्रतिशत तक की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जो प्रति वित्तीय वर्ष प्रति निर्यातक के लिए 20 लाख रुपये की सीमा के अधीन होगी।
4. व्यापार खुफिया एवं सुगमीकरण के लिए एकीकृत सहायता (इनसाइट) – इनसाइट, निर्यातकों की क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करता है, ‘जिलों को निर्यात केंद्र’ पहल के तहत जिलों और क्लस्टर स्तर पर सुविधा प्रदान करता है, और व्यापार खुफिया प्रणालियों का विकास करता है। वित्तीय सहायता परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के संस्थानों और विदेशों में भारतीय दूतावासों से प्राप्त प्रस्तावों के लिए अधिसूचित सीमाओं के अधीन 100 प्रतिशत तक सहायता प्रदान की जाती है।
इन समन्वित वित्तीय और इकोसिस्टम संबंधी उपायों के माध्यम से, सरकार का लक्ष्य पूंजी की लागत को कम करना, व्यापार वित्त साधनों में विविधता लाना, अनुपालन तत्परता को बढ़ाना, लाजिस्टिक संबंधी बाधाओं को दूर करना और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए विदेशी बाजार एकीकरण को सुदृढ़ करना है।
तीन उपाय – बाजार पहुंच सहायता, निर्यात ऋण के लिए पूर्व और पश्चात शिपमेंट पर ब्याज सब्सिडी और निर्यात ऋण के लिए संपार्श्विक सहायता – पहले से ही कार्यान्वयन के अधीन हैं। इस शुभारंभ के साथ, ईपीएम के तहत प्रस्तावित 11 उपायों में से 10 अब प्रचालनगत हैं।
राज्य सरकारों, निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों, जिनमें एफआईईओ, ईईपीसी, जीजेईपीसी, सीआईआई, एफआईसीआई, पीएचडीसीसीआई, एसोचैम और नैसकॉम शामिल हैं, ने इस पहल का स्वागत किया और इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समर्थन व्यक्त किया।
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