पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस क्षेत्र से जुड़े संयंत्रों पर अमरीका और इस्राएल ने संयुक्त हमले किए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, असालुयेह विशेष आर्थिक ऊर्जा क्षेत्र में स्थित गैस प्रसंस्करण संयंत्रों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को भी निशाना बनाया गया है।
इस हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा स्थलों को सीधा निशाना बनाते हुए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के लिए चेतावनी जारी की है। ईरान ने इस्राएल पर मिसाइल हमलें भी किए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
ईरान की धमकियों ने तनाव को काफी बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर दुनियाभर के तेल और गैस बाजार पर दिख रहा है। हमले के डर से कच्चे तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। खाड़ी देशों ने इन धमकियों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि आम जनता की सुविधाओं और क्षेत्र की शांति की रक्षा करना बेहद जरूरी है। कतर ने इस हमले को खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा है कि ऊर्जा संसाधनों को निशाना बनाने से पूरी दुनिया की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ब्रेंट क्रूड करीब 6 फीसदी उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, वहीं यूरोप में गैस की कीमतें 7 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई हैं। इस बीच, तनाव को कम करने के लिये राजनयिक प्रयास जारी हैं इनमें रियाद में अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक शामिल है।
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