दुनिया भर में औसत मासिक तापमान अत्यधिक बढने के कारण 2024 के अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहने की आशंका है। कॉप-29 सम्मेलन के दौरान जारी विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि महत्वाकांक्षी पेरिस समझौता गंभीर खतरे में है। पेरिस समझौते का लक्ष्य धरती की सतह के दीर्घकालिक औसत तापमान में वृद्धि को दो डिग्री से नीचे रखना है। समझौते में इस तापमान को एक दशमलव पांच-चार डिग्री तक सीमित रखने के प्रयासों पर बल दिया गया है।
विश्व मौसम संगठन द्वारा प्रयुक्त छह अंतरराष्ट्रीय आंकडों के विश्लेषण के अनुसार जनवरी से सितंबर के दौरान सतह की वायु का वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक युग से पहले के औसत तापमान से एक दशमलव पांच चार डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इस कारण अल नीनो की घटना को प्रोत्साहन मिला।
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