वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के अपने निरंतर प्रयासों को जारी रखते हुए पंजाब और हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्रमशः 25.09.2025 और 26.09.2025 को दो महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें कीं। पंजाब के 23 और हरियाणा के 22 जिलों के जिला मैजिस्ट्रेट (डीएम)/उपायुक्त (डीसी) और एसएसपी सहित विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित समीक्षा बैठकों में भाग लिया।
समीक्षा में आयोग के निर्देश 90 और 92 के अनुपालन में धान की कटाई के मौसम 2025 के लिए दोनों राज्यों की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन निर्देशों में प्रभावी इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन, हॉटस्पॉट जिलों में धान की पराली जलाने पर रोक लगाने, पंजाब और हरियाणा राज्यों द्वारा की जा रही निगरानी और कार्रवाई को अनिवार्य बनाया गया है।
इसके अलावा हॉटस्पॉट जिलों में क्षेत्र स्तर पर प्रगति की निगरानी के लिए दोनों राज्यों में उड़न दस्तों की टीमें तैनात की जाएंगी। राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया कि वे जिला प्रशासन के सभी संबंधितों को उड़न दस्तों की सुविधा प्रदान करने और उन्हें समय-समय पर अद्यतन (अपडेट) स्थिति उपलब्ध कराने का निर्देश दें।
इस बात पर प्रकाश डाला गया कि मोहाली के एसएएस नगर में स्थित खेती भवन में सीएक्यूएम सेल की स्थापना की गई है जो पंजाब और हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय समन्वय की सुविधा के लिए धान की पराली प्रबंधन और प्रदूषण गतिविधियों की निगरानी करेगा। आयोग ने सतत निगरानी और सतर्कता के साथ जमीनी स्तर पर कार्रवाई में तेजी लाने के लिए प्रकोष्ठ के साथ बेहतर सहयोग का आग्रह किया।
दोनों राज्यों द्वारा 2025 के लिए अपनी-अपनी राज्य कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। व्यापक विचार-विमर्श के बाद सीएक्यूएम के अध्यक्ष की ओर से पराली जलाने और कृषि पद्धतियों के विविधीकरण के मुद्दे को हल करने के लिए निम्नलिखित कार्य बिंदुओं का निर्देश दिया गया :
पंजाब के लिए कार्य बिंदु
हरियाणा के लिए कार्य बिंदु
दोनों राज्यों द्वारा अब तक किए गए प्रयासों और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए सीएक्यूएम ने इस बात पर जोर दिया कि आगामी सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी जिला प्रशासनों को प्रोत्साहन और निवारण दोनों वैधानिक उपायों को लागू करने का निर्देश दिया गया। दीर्घकालिक उद्देश्य स्व-चालित पराली प्रबंधन प्रणाली के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो किसानों को पर्याप्त लाभ प्रदान करे। प्रगति की निगरानी करने और अनुमोदित कार्य योजनाओं के सख्त कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आयोग लगातार और गहन समीक्षा करेगा।
सीएक्यूएम किसानों और आम लोगों सहित सभी हितधारकों से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए स्वच्छ हवा के साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर काम करने का आह्वान करता है।
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