भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत प्रमुख बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सामूहिक रूप से 915.17 मिलियन टन कार्गो का प्रबंधन किया है, जो कि 904 मिलियन टन के वार्षिक लक्ष्य से अधिक है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 7.06 प्रतिशत अधिक है, जो इस क्षेत्र की मजबूत रिकवरी, बेहतर दक्षता और निरंतर विकास को दर्शाता है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि बंदरगाहों की अवसंरचना के आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाने और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत भारत को एक अग्रणी नौवहन राष्ट्र के रूप में मजबूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनकारी सुधारों और रणनीतिक निवेशों के प्रभाव को रेखांकित करती है।
केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “हमारे प्रमुख बंदरगाहों द्वारा 915 मिलियन टन से अधिक का रिकॉर्ड कार्गो प्रबंधन, भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, हम भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए विश्व स्तरीय बंदरगाह अवसंरचना का निर्माण कर रहे हैं। इसके साथ ही कुशलता में सुधार कर रहे हैं और निर्बाध लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित कर रहे हैं। यह उपलब्धि ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत भारत को एक वैश्विक नौवहन शक्ति के रूप में स्थापित करने के हमारे संकल्प को और सुदृढ़ करती है।”
यह प्रदर्शन प्रमुख बंदरगाहों में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है, जिसमें दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण 160.11 मीट्रिक टन के साथ शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में उभरा है, इसके बाद पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण 156.45 मीट्रिक टन और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) 102.01 मीट्रिक टन पर है। विशाखापत्तनम बंदरगाह प्राधिकरण, मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण, चेन्नई बंदरगाह प्राधिकरण और न्यू मंगलौर बंदरगाह प्राधिकरण सहित अन्य प्रमुख बंदरगाहों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसने समग्र कार्गो माल ढुलाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विकास दर के संदर्भ में, मोर्मुगाओ बंदरगाह प्राधिकरण ने 15.91 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, इसके बाद कोलकाता डॉक सिस्टम 14.28 प्रतिशत और जेएनपीए 10.74 प्रतिशत पर रहे, जो बेहतर दक्षता और कार्गो की बढ़ती मात्रा को दर्शाते हैं।
कार्गो प्रबंधन में यह निरंतर वृद्धि कई कारकों द्वारा संचालित रही है, जिनमें बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और उनकी क्षमता में वृद्धि, सुदृढ़ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी तथा निर्बाध हिंटरलैंड लिंकेज (पश्चभूमि संपर्क), डिजिटल एवं स्मार्ट पोर्ट पहलों को अपनाना, और कोयला, कच्चे तेल, कंटेनर, उर्वरक एवं पी.ओ.एल. जैसी प्रमुख वस्तुओं के संचालन में वृद्धि शामिल है। साथ ही, जहाजों के टर्नअराउंड समय में सुधार और बंदरगाहों पर व्यापार सुगमता ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय बंदरगाह-आधारित विकास, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और स्थिरता पर केंद्रित एक व्यापक समुद्री रणनीति को आगे बढ़ाना जारी रखे हुए है।
वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन, व्यापार में बढ़ते भरोसे और परिचालन दक्षता व क्षमता उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से अपनाए गए नीतिगत उपायों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। नीतिगत गति और बुनियादी ढांचे में निवेश के निरंतर बने रहने से, भारत के प्रमुख बंदरगाह नई उपलब्धियां हासिल करने और देश की आर्थिक वृद्धि व वैश्विक व्यापार नेतृत्व में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
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