केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई इंडियाएज 2025 कार्यक्रम में हरित विकास: प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ स्थायित्व का समन्वय’ विषय पर विशेष पूर्ण अधिवेशन को संबोधित किया। उन्होंने टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी और सुदृढ़ आर्थिक विकास की ओर भारत के रणनीतिक बदलाव पर ज़ोर दिया और प्रगतिशील नीतिगत ढांचे को आकार देने तथा सरकार-उद्योग सहयोग को मज़बूत करने में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की भूमिका की सराहना की।
विकसित भारत@2047 के तहत भारत के विकास पथ पर प्रकाश डालते हुए भूपेंद्र यादव ने देश के मज़बूत आर्थिक आधार और सतत विकास में तीव्र प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “स्वच्छ औद्योगीकरण कोई बाधा नहीं है; यह आर्थिक विस्तार, नवाचार, सुदृढ़ता और भविष्य की समृद्धि के लिए उत्प्रेरक है।” उन्होंने कहा कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भविष्य में कार्बन-संबंधी व्यापार चिंताओं से बचने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करना एक रणनीतिक अनिवार्यता है।
भूपेंद्र यादव ने मानवजनित और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के वैश्विक पर्यावरणीय नेतृत्व की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भारत असंतुलनों को दूर करने, हरित प्रौद्योगिकियों को प्राथमिकता देने, चक्रीयता को समाहित करने, टिकाऊ विनिर्माण को बढ़ावा देने और प्रकृति-आधारित समाधानों को एकीकृत करने के लिए विकास को पुनर्परिभाषित करने वाला एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार बनकर उभरा है। उन्होंने देश के हरित औद्योगिक परिवर्तन को गति देने वाले हालिया सुधारों और पहलों का विस्तृत विवरण दिया। जीएसटी 2.0 सुधारों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा, “जीएसटी 2.0 सुधार नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों, स्वाभाविक रूप से सड़नशील प्लास्टिक, अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करके हरित विकास की पुष्टि करते हैं। उद्योग जगत को हरित विनिर्माण में निवेश करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को एकीकृत करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए प्रौद्योगिकियों के विस्तार हेतु सहयोग करने के इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।”
भूपेंद्र यादव ने भारतीय उद्योग की स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों और सुधार उपायों पर प्रकाश डाला। इनमें सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना, और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन 2025, संशोधित ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम और पर्यावरण लेखा परीक्षा नियम 2025 जैसी अन्य प्रमुख पहल शामिल हैं। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे “देश की स्थायी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने के इन प्रयासों में सक्रिय रूप से भागीदार बनें।”
पर्यावरण सम्मेलन कॉप30 से लौटकर, भूपेंद्र यादव ने बताया कि सम्मेलन भारत की अपेक्षाओं पर खरा उतरा। उन्होंने कहा, “सर्वसम्मति से लिए गए 29 निर्णय जलवायु वित्त, एकतरफा व्यापार उपायों, प्रौद्योगिकी और न्यायसंगत परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।” उन्होंने प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन कार्यक्रम की स्थापना और न्यायसंगत परिवर्तन के लिए एक संस्थागत व्यवस्था का उल्लेख किया।
केन्द्रीय मंत्री ने उद्योग जगत में बदलाव लाने में सर्कुलर इकोनॉमी और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) की परिवर्तनकारी भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “ईपीआर स्थायी अपशिष्ट परितंत्र का निर्माण करता है, रीसाइक्लिंग राजस्व को बढ़ाता है, अनौपचारिक श्रमिकों को औपचारिक रूप देता है, और 33 लाख नए रोज़गार के अवसर पैदा कर सकता है, जिससे एक हरित-कुशल कार्यबल का निर्माण हो सकता है।” उद्योग नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हुए, उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया जो आत्मनिर्भर सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में भारत की नीतिगत पहल को मज़बूत करें। उन्होंने सीआईआई के योगदान की भी सराहना की और कहा, “उत्पादन-आधारित सर्कुलर इकोनॉमी पीएलआई जैसी पहल मज़बूत ईपीआर प्रणालियों और हरित सार्वजनिक खरीद के साथ मिलकर रीसाइक्लिंग में तेज़ी ला सकती हैं और आत्मनिर्भर भारत को मज़बूत कर सकती हैं।”
भूपेंद्र यादव ने उद्योगों से अनुसंधान एवं विकास, हरित विनिर्माण और एमएसएमई सहयोग में निवेश के माध्यम से स्थायित्व को प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश का हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना, स्थायित्व को प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ जोड़ने के अभूतपूर्व अवसर प्रस्तुत करता है। उद्योग जगत भारत के आत्मनिर्भर, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ औद्योगिक आधार के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा सकता है।
केन्द्रीय मंत्री ने सामूहिक उत्तरदायित्व के संदेश के साथ अपने संबोधन का समापन किया और कहा कि विकसित भारत@2047 की ओर राष्ट्र की यात्रा केवल विकास के बारे में नहीं है; यह समावेशी, मजबूती और सतत समृद्धि के बारे में है। हम सब मिलकर आर्थिक प्रगति का एक ऐसा मार्ग निर्धारित करेंगे जो स्थायित्व को एक अवसर के रूप में उपयोग करे, न कि एक बाधा के रूप में। इस अवसर पर सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी; सीआईआई राष्ट्रीय पर्यावरण समिति के अध्यक्ष शिव सिद्धांत नारायण कौल और सीआईआई राष्ट्रीय अपशिष्ट-से-मूल्य समिति के अध्यक्ष मसूद आलम मलिक शामिल थे।
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