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IIT बॉम्बे में ‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ का उद्घाटन किया गया

भारत के सबसे आशाजनक डीप-टेक उद्यमों के राष्ट्रीय प्रदर्शन के रूप में आयोजित होने वाले ‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ का उद्घाटन आज मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे परिसर के एस्पायर – आईआईटी बॉम्बे रिसर्च पार्क फाउंडेशन में किया गया।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार और प्रधानमंत्री के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) के अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

इस विशिष्ट कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन तथा आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह प्री-समिट भारत इनोवेट्स 2026 यात्रा का प्रारंभिक चरण है, जिसका समापन जून 2026 में फ्रांस के नीस शहर में भारत के वैश्विक नवाचार प्रस्तुतीकरण के साथ होगा। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का हिस्सा है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी।

अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में डीप-टेक नवाचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अत्याधुनिक तकनीकों को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों, शोध तंत्र और स्टार्टअप्स की भूमिका को रेखांकित किया।

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इनोवेट्स 2026 एक “पूरे सरकार का प्रयास” है। यह दुनिया के सामने भारत की अत्याधुनिक डीप-टेक क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, अंतरिक्ष विभाग और रक्षा मंत्रालय को एक साझा मंच पर लाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल वैश्विक प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने का भी प्रयास है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा के अंक नहीं, बल्कि समाज में सार्थक योगदान देना है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना है। उन्होंने निवेशकों और कॉरपोरेट्स से महानगरों से परे होनहार स्टार्टअप्स की पहचान करने का आह्वान किया।

आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप संस्थापकों से राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ काम करने का आह्वान किया और कहा कि वे भारत के नवाचार इतिहास का नया अध्याय लिख सकते हैं। उन्होंने नवाचारकर्ताओं को भारत का राजदूत बताया और देश को गौरवान्वित करने के लिए प्रेरित किया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने भारत के नवाचार परिदृश्य पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां लगभग 2 लाख स्टार्टअप और करीब 125 यूनिकॉर्न हैं कंपनिया। उन्होंने बताया कि 2017–18 में यह संख्या केवल 24 यूनिकॉर्न थी। वर्तमान में भारत में 1,000 से अधिक निवेशक सक्रिय हैं और हाल के वर्षों में लगभग 70–80 अरब रुपये का वेंचर कैपिटल भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश किया गया है।

उन्होंने डीप-टेक वित्तपोषण में कमी की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि कुल वेंचर कैपिटल निवेश में से केवल 4–5 अरब डॉलर ही डीप-टेक क्षेत्र में गया है। इस स्थिति को सुधारने के लिए जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष को मंजूरी दी, जो निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास और स्टार्टअप्स को इक्विटी भागीदारी और दीर्घकालिक वित्तपोषण के माध्यम से समर्थन देगा। इस फंड के प्रबंधन के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड और बीआईआरएसी (डीबीटी) को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही वैकल्पिक निवेश कोष और आईआईटी अनुसंधान पार्कों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। डीएसटी वर्तमान में साइबर-फिजिकल सिस्टम पर राष्ट्रीय मिशन, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और निधि सीड सपोर्ट योजनाओं के माध्यम से भारत के अनुमानित 8,000-10,000 डीप-टेक स्टार्टअप में से लगभग 30-40% का पोषण कर रहा है।

आईआईटी और आईआईएससी के पारिस्थितिकी तंत्र की प्रशंसा करते हुए प्रोफेसर करंदीकर ने कहा, “डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने में आईआईटी और आईआईएससी की बड़ी भूमिका है।”

आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने स्वागत भाषण में कहा कि भारत इनोवेट्स केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक डीप-टेक इकोसिस्टम है, जो तीन स्तंभों-शिक्षा प्रणाली, रणनीतिक निवेशक और कॉर्पोरेट सेक्टर पर आधारित है, जो तकनीक को वास्तविक प्रभाव में बदलने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि देशभर से 3,000 से अधिक स्टार्टअप आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कड़े बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद 13 थीमैटिक क्षेत्रों में 137 सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स का चयन किया गया।

उद्घाटन के बाद गणमान्य लोगों ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का दौरा किया, जहां उन्होंने स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत की और उनके नवाचारों का मुआयना किया। 70 से अधिक स्टार्टअप्स ने विभिन्न पिच सत्रों में अपने विचार रखे, जिसके बाद निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने रिवर्स पिच के माध्यम से निवेश के प्राथमिक क्षेत्रों और उद्योग की तकनीकी आवश्यकताओं पर चर्चा की। इसमें प्राथमिकता वाले निवेश क्षेत्रों और उद्योग-प्रेरित तकनीकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया।

भारत इनोवेट्स 2026 डीप-टेक प्री-समिट भारत के नवाचार इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाता है और उभरते स्टार्टअप्स को निवेशकों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं से जुड़ने का राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।

इस कार्यक्रम में 13 महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों-एडवांस्ड कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर एवं मेडटेक, स्पेस एवं डिफेंस, एनर्जी एवं सस्टेनेबिलिटी, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटीज एवं मोबिलिटी, ब्लू इकोनॉमी, नेक्स्ट-जेन कम्युनिकेशन, एग्री एवं फूड टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल्स, मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्री 4.0 तथा आपदा प्रबंधन में नवाचार प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

भारत इनोवेट्स के बारे में:

भारत इनोवेट्स 2026, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसे प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय के रणनीतिक मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों में विकसित अनुसंधान आधारित तकनीकी नवाचारों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।

यह कार्यक्रम 22 मार्च 2026 को भी जारी रहेगा, जिसमें अतिरिक्त स्टार्टअप पिच सत्र, नीति चर्चा, निवेशक सहभागिता और ग्रैंड फिनाले एवं पुरस्कार समारोह आयोजित होगा, जहां सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप प्रस्तुतियों को सम्मानित किया जाएगा।

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