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भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के तीसरे दिन नई दिल्ली में भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी बैठक का आयोजन

भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के तीसरे दिन (21.3.2026) नई दिल्ली में भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने की।

बैठक में विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, मलावी सरकार के ऊर्जा एवं खनन मंत्री डॉ. जीन मथांगा, अफ्रीका50 के सीईओ एलेन एबोबिस, कई अफ्रीकी देशों के मंत्री, अफ्रीकी संघ और अफ्रीका50 के नेता, राजदूत, उच्चायुक्त, विद्युत कंपनियों के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, विकास भागीदार और उद्योग जगत के नेता उपस्थित थे।

इन चर्चाओं में एक स्पष्ट और दूरदर्शी दृष्टिकोण यह उभर कर आया कि भारत और अफ्रीका ठोस परिणामों पर केंद्रित एक संरचित और कार्य-उन्मुख साझेदारी के माध्यम से अपने सहयोग को और गहरा करेंगे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और अफ्रीका नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, परस्पर जुड़े ग्रिड प्रणालियों के विकास, ऊर्जा भंडारण और लचीले समाधानों को बढ़ावा देने और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के माध्यम से क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इसमें विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत के व्‍यापक अनुभव और अफ्रीका की बढ़ती क्षमता का लाभ उठाने पर बल दिया गया। दोनों पक्षों ने निवेश-आधारित सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के महत्व का भी उल्‍लेख किया, जिसका उद्देश्य एक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है जो दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को गति प्रदान करने में सक्षम हो।

मनोहर लाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक विकास को गति देने, गरिमा सुनिश्चित करने और अवसरों को खोलने के लिए बिजली महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संपर्क के लिए एक परिवर्तनकारी मार्ग के रूप में ‘एक सूर्य, एक दुनिया, एक ग्रिड’ की परिकल्पना का भी उल्‍लेख किया।

उन्‍होंने अफ्रीकी साझेदारों का हार्दिक स्वागत किया और विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा प्राप्त करने की साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका, वैश्विक जनसंख्या का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं और समावेशी, न्यायसंगत तथा भविष्य के लिए तैयार विकास की समान आकांक्षाएं रखते हैं। उन्होंने ऊर्जा घाटे से अधिशेष की ओर भारत की यात्रा और नवीकरणीय ऊर्जा में इसकी तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये अनुभव अफ्रीका के लिए व्यावहारिक एवं विस्तार योग्य मॉडल प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अफ्रीका50 और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच सहयोग, जिसमें केन्या ट्रांसमिशन परियोजना भी शामिल है, को इस बात का एक सशक्त उदाहरण बताया कि कैसे नवीन वित्तपोषण, तकनीकी विशेषज्ञता और सार्वजनिक-निजी भागीदारी लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण कर सकती है।

मनोहर लाल ने नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और लचीलापन तथा संस्थागत सुदृढ़ीकरण के साथ क्षमता निर्माण सहित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों का उल्‍लेख किया। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अफ्रीका के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अफ्रीका ऊर्जा सहयोग लेन-देन पर आधारित नहीं बल्कि परिवर्तनकारी है, जो सह-निर्माण पर आधारित है, और इस साझा यात्रा में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया।

श्रीपाद नाइक ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-अफ्रीका साझेदारी को केवल इरादे से आगे बढ़कर कार्रवाई की ओर बढ़ना चाहिए। ऊर्जा तक पहुंच को केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित न रखकर, आर्थिक परिवर्तन के एक प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने समावेशी विकास की नींव के रूप में सभी के लिए विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता का उल्‍लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि यह साझेदारी एक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण से निर्देशित है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक प्रभाव पैदा करना और भारत और अफ्रीका दोनों के समुदायों को सशक्त बनाना है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सतत सुशासन के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रभावी सिंचाई जल प्रबंधन को प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका के लिए साझेदारी, प्रभुत्व और प्रतिस्पर्धा के आधार के बजाय सहयोग एवं साझा मूल्यों पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा और अफ्रीकी देशों के बीच साझेदारी ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल शासन और कृषि सहयोग पर आधारित है।

अफ्रीका50 के सीईओ एलेन एबोबिस ने वैश्विक निवेश परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि हम सहायता नहीं, बल्कि प्रभाव और प्रतिफल के लिए निवेश की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर का उल्‍लेख किया कि अफ्रीका एकीकृत योजना और नए निवेश ढांचों के समर्थन से, निवेश योग्य परियोजनाओं के विकास, संचरण विस्तार और निजी पूंजी जुटाने पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है।

डॉ. जीन मथांगा ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के माध्यम से सतत विकास और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जिसमें ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए कम लागत वाले सौर समाधान, पवन ऊर्जा परियोजनाएं और भारत की भूमिका को ध्यान में रखते हुए एक सशक्त ऊर्जा परिवर्तन शामिल है। उन्होंने अफ्रीका के समावेशी विद्युत प्रणाली के एजेंडे के साथ सहज रूप से तालमेल बिठाते हुए विद्युतीकरण, पारेषण अवसंरचना विकास और स्मार्ट मीटरिंग, ग्रिड और माइक्रोग्रिड पर सहयोग को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। इन प्रयासों से ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, खनिजों तक पहुंच और विस्तारित बाजारों जैसे बहुआयामी लाभ मिलने की उम्मीद है। अफ्रीका के लिए, ये किफायती प्रौद्योगिकी और अवसंरचना, बेहतर ग्रिड विश्वसनीयता, विद्युतीकरण और स्थायी साझेदारी प्रदान करते हैं, तथा भारत की तकनीकी क्षमताओं को अफ्रीका की विशाल संसाधन क्षमता के साथ पूरक करते हुए सुरक्षित और समावेशी विद्युत प्रणालियों का निर्माण करते हैं।

भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी सतत विकास के लिए सहयोगात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचा तैयार करने पर केंद्रित है, जिसमें ऊर्जा, अवसंरचना और क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया गया है। यह साझेदारी अफ्रीका के विकास पथ को गति देने के लिए भारत के अनुभव और क्षमताओं, विशेष रूप से विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रिड कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक आदर्श के रूप में उपयोग करती है। अफ्रीका50 जैसी संस्थाओं और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से, यह साझेदारी निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सौर छत परियोजनाओं, जल-सौर एकीकरण, मिनी ग्रिड और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों जैसे व्यापक समाधानों को बढ़ावा देती है। यह समावेशी विकास को गति देने के लिए नीतिगत ढांचे, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और मानव संसाधन विकास पर भी ध्यान केंद्रित करती है। अंततः, इस साझेदारी का उद्देश्य ऊर्जा तक पहुंच में अंतर को कम करना, क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ाना और अफ्रीकी देशों में दीर्घकालिक परिवर्तनकारी प्रभाव पैदा करना है।

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