भारत और यूरोपीय संघ ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के लिए आधिकारिक स्तर की बातचीत पूरी कर ली है, जिसकी घोषणा आज होने वाली है। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच दो-तरफ़ा व्यापार को बढ़ावा देना और आर्थिक संबंधों को मज़बूत करना है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय नज़रिए से यह व्यापार समझौता संतुलित और दूरदर्शी है, जो भारत को यूरोपीय संघ के साथ बेहतर आर्थिक एकीकरण में मदद करेगा। यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा।
समझौते की घोषणा नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेजबानी में होने वाले भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान की जाएगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो लुई कोस्ता आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करेंगे। इस समझौते से कपड़ा, रसायन, रत्न और आभूषण, बिजली मशीनरी, चमड़ा और जूते जैसे श्रम–प्रधान क्षेत्रों के कई भारतीय सामान को शुल्क मुक्त यूरोपीय बाजार मिलने की संभावना है। भारतीय सामान पर यूरोपीय संघ में लगभग 3 दशमलव 8 प्रतिशत शुल्क लगता है, लेकिन श्रम–प्रधान क्षेत्रों पर यह लगभग 10 प्रतिशत है। यूरोपीय संघ के सामान पर भारत का भारित औसत शुल्क लगभग 9 दशमलव 3 प्रतिशत है। भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते में वस्तुओं, सेवाओं और निवेश के व्यापार सहित 24 अध्याय शामिल हैं। दोनों पक्ष निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेत से संबंधित समझौतों पर भी बातचीत कर रहे हैं।
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