अंतर्राष्ट्रीय

India-Pakistan Ceasefire: भारत और पाकिस्तान के DGMO के बीच आज दोपहर 12 बजे होगी वार्ता

भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों यानी डीजीएमओ के बीच आज दोपहर 12 बजे बातचीत होगी ताकि दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम को लंबे समय तक बनाए रखने के तौर-तरीकों पर चर्चा की जा सके।

इससे पहले, सैन्य संचालन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कल कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में 9 आतंकी ठिकानों पर हुए हमले में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं। इनमें यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदासिर अहमद जैसे आतंकियों के नाम शामिल हैं, जो कंदहार विमान अपहरण और पुलवामा विस्फोट में शामिल थे। कल नई दिल्ली में उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की संकल्पना आतंकियों, उन्हें संरक्षण देने वालों और आतंकी ढांचे को नष्ट करने के उद्देश्य से की गई है। राजीव घई ने कहा कि सीमापार आतंकी शिविरों और प्रशिक्षण स्थलों की सटीक जानकारी के आधार पर ही इस ऑपरेशन को कार्यरूप दिया गया।

राजीव घई ने कहा कि उन्हें शनिवार को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने युद्ध समाप्त करने का प्रस्ताव दिया जिसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी और हवाई घुसपैठ बंद हुई। हालांकि उन्होंने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि सहमति के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तानी सेना ने फिर से गोलीबारी की और ड्रोन भेजे। राजीव घई ने कहा कि पाकिस्तान के डीजीएमओ को हॉटलाइन संदेश से बताया गया है कि संघर्ष विराम का उल्लंघन होने पर उसका जवाब सख्ती से दिया जाएगा। डीजीएमओ ने कहा कि संघर्ष विराम का उल्लंघन होने पर कमांडरों को जवाबी कार्रवाई करने को कहा गया है।

डीजीएमओ ने ऑपरेशन सिंदूर में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सशस्त्र बलों के पांच शहीदों और नागरिकों को भी श्रद्धांजलि दी।

यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान के कितने विमान मार गिराए गए, हवाई संचालन महानिदेशक एयर मार्शल ए. के. भारती ने कहा कि दुश्मन के विमानों को भारतीय सीमा में प्रवेश करने से रोका गया और कुछ विमानों को निश्चित रूप से मार गिराया गया।

एयर मार्शल भारती ने यह भी कहा कि वायु सेना ने अपने उद्देश्य हासिल कर लिए हैं और सभी पायलट सुरक्षित हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवादियों को निशाना बनाने तक सीमित था ताकि कोई और नुकसान न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पार से हवाई हमलों के तुरंत बाद पाकिस्तान ने अफरा-तफ़री में नागरिकों, ग्रामीण बस्तियों और धार्मिक स्थलों पर हमले किए जिनमें कई लोग मारे गए। डीजीएमओ ने यह भी बताया कि इन हमलों में भारतीय वायुसेना की भूमिका महत्वपूर्ण थी जिसने आतंकी शिविरों पर हमले किए और नौसेना ने युद्धसामग्री उपलब्ध कराई।

हवाई संचालन महानिदेशक एयर मार्शल ए. के. भारती ने बताया कि लक्ष्यों का चयन सावधानीपूर्वक किया गया था और वायुसेना को बहावलपुर और मुरीदके प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने का लक्ष्य दिया गया था। उन्होंने बताया कि इन लक्ष्यों के लिए योजना इस प्रकार बनाई गई जिससे अन्य क्षति से बचा जा सके।

एयर मार्शल भारती ने मुरीदके और बहावलपुर आतंकी शिविरों को मिसाइल हमले से हुए नुकसान के वीडियो भी दिखाए। उन्होंने कहा कि 7 मई की शाम को पाकिस्तान ने नागरिक क्षेत्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों की ओर कई मानवरहित विमान और छोटे ड्रोन भेजे जिन्हें बीच में ही नष्ट कर दिया गया। एयर मार्शल भारती ने बताया कि भारत के निशाने पर आतंकवादी थे, जबकि पाकिस्तान ने नागरिक और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया। जवाब में, भारत ने लाहौर और गुजरांवाला में पाकिस्तानी राडारों पर हमले किए।

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि 8 और 9 मई की रात को पाकिस्तान ने भारत के हवाई क्षेत्र में ड्रोन और विमान उड़ाए और कई सैन्य ढांचों को निशाना बनाने के असफल प्रयास किए। डीजीएमओ ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने 7 से 10 मई के बीच नियंत्रण रेखा पर तोपखाने और छोटे हथियारों की गोलीबारी में लगभग 35 से 40 सैन्य कर्मियों के मारे जाने की बात मानी है।

एयर मार्शल ए के भारती ने कहा कि वायुसेना की तैयारियों के कारण पाकिस्तान की किसी योजना को सफल नहीं होने दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि 8 मई की शाम को, पाकिस्तान ने मानवरहित हवाई प्रणालियों और ड्रोन से जम्मू, ऊधमपुर, पठानकोट, अमृतसर, बठिंडा, डलहौजी, जैसलमेर में वायु सेना के केंद्रों पर हमले किए। जवाब में, भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान के हवाई ठिकानों, कमान सेंटरों, बुनियादी सैन्य ढांचों और वायु रक्षा प्रणालियों पर हमले किए। इससे स्पष्ट संदेश गया कि आक्रामकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नौसेना संचालन महानिदेशक वाइस एडमिरल ए एन प्रमोद ने कहा कि नौसेना उत्तरी अरब सागर में निर्णायक स्थिति में है और समुद्र तथा जमीन पर कराची सहित चुनिंदा लक्ष्यों पर हमला करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की तैनाती के कारण पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना की इकाइयां रक्षात्मक मुद्रा में रहने के लिए मजबूर हैं।

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