खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों की तारीखों की घोषणा हो गई है। केन्द्र-शासित प्रदेश लद्दाख 23 जनवरी से लेकर 27 जनवरी, 2025 के दौरान आइस स्पोर्ट्स से जुड़ी स्पर्धाओं की मेजबानी करेगा, जबकि केन्द्र-शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर 22 फरवरी से लेकर 25 फरवरी, 2025 के दौरान स्नो स्पोर्ट्स से जुड़ी स्पर्धाओं का आयोजन करेगा।
शीतकालीन खेल अगले वर्ष अप्रैल में बिहार में होने वाले यूथ और पैरा गेम्स के साथ खेलो इंडिया सीजन की शुरुआत करेंगे। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स भी शीघ्र ही होने वाले हैं।
खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों की शुरुआत 2020 में हुई थी। इसके उद्घाटन संस्करण में 306 महिलाओं सहित लगभग 1000 एथलीटों ने भाग लिया था। पिछले कुछ वर्षों में इन खेलों में भागीदारी बढ़ी है। वर्ष 2021 में 1350 से अधिक और 2022 में 1500 से अधिक एथलीटों की भागीदारी ने जम्मू एवं कश्मीर में शीतकालीन खेलों के बढ़ते आकर्षण को रेखांकित किया।
केआईडब्ल्यूजी के 2024 के संस्करण में 700 से अधिक एथलीटों, 141 सहायक कर्मचारियों, 113 तकनीकी अधिकारियों, 250 से अधिक स्वयंसेवकों और खेल-विशिष्ट स्वयंसेवकों सहित 1200 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी देखी गई और कुल 136 पदक दांव पर लगे थे।
यह (2024) पहली बार था जब भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ मिलकर राष्ट्रीय खेल महासंघों और भारतीय ओलंपिक संघ के सहयोग से खेलों के तकनीकी संचालन का प्रबंधन किया।
माननीय केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “हम एक बार फिर खेलो इंडिया गेम्स के रोमांचक सीजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शीतकालीन खेल महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि भारत को 2026 शीतकालीन ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने हेतु सर्वश्रेष्ठ एथलीट खोजने की जरूरत है।”
यह लगातार दूसरा वर्ष होगा जब केन्द्र-शासित प्रदेश लद्दाख खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के एक हिस्से की मेजबानी करेगा। वर्ष 2024 संस्करण से पहले, जम्मू एवं कश्मीर सभी स्पर्धाओं का आयोजन करता था। लेह ने फरवरी 2024 में स्केटिंग और हॉकी जैसी आइस स्पोर्ट्स से जुड़ी स्पर्धाओं की सफलतापूर्वक मेजबानी की थी। हमेशा की तरह, गुलमर्ग ने स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसी स्नो स्पोर्ट्स से जुड़ी स्पर्धाओं का आयोजन किया था।
डॉ. मंडाविया ने कहा, “हमारा प्रयास शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक एथलीटों को स्कीइंग एवं स्केटिंग के लिए प्रोत्साहित करना है। हम पहले ही सुदूरवर्ती हिमालयी गांवों के कई एथलीटों को इन खेलों में भाग लेते देख चुके हैं। यह बेहद उत्साहजनक है।”
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