मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी पर स्थित दीपथून स्तंभ पर दीपक प्रज्ज्वलित करने की अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने कहा कि जिस स्थान पर दीपथून नामक पत्थर का स्तंभ है, वह भगवान सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर का है। पीठ ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से परामर्श के बाद दीपक जलाया जा सकता है। अदालत ने कहा है कि इसमें सम्मिलित होने वाले व्यक्तियों की संख्या निर्धारित की जा सकती है।
हिंदू मुन्नानी के अधिवक्ता और याचिकाकर्ता निरंजन एस कुमार ने बताया कि खंडपीठ ने कहा है कि दीपक जलाना अनिवार्य है और इसे तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर ही जलाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता राजेश ने भी न्यायालय के आदेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि दीपथून के रूप में दीपक जलाया जाना चाहिए और मंदिर प्रशासन को इसके लिए आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला तमिलनाडु में हिंदुओं और भगवान मुरुगन के श्रद्धालुओं की जीत है। पिछले महीने, हिंदू त्यौहार कार्तिकई दीपम के दौरान दक्षिणपंथी समूहों की पुलिस के साथ झड़प के बाद अशांति फैल गई थी। इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने पहाड़ी पर स्थित मंदिर में दीपक जलाने का निर्देश दिया था। दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने याचिकाकर्ता और दस अन्य लोगों को कार्तिकई दीपम जलाने के लिए तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर स्थित दीपम स्तंभ तक जाने की अनुमति देने का निर्देश दिया था।
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