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National Institute of Sowa-Rigpa and the Morarji Desai National Institute of Yoga launched a Yoga Wellness Instructor Certificate Course in Leh
भारत

राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने लेह में योग कल्याण प्रशिक्षक प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम शुरू किया

लेह स्थित राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (एनआईएसआर) में 3 माह (400 घंटे) का योग कल्याण प्रशिक्षक प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। यह पाठ्यक्रम नई दिल्ली स्थित मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) और लेह स्थित राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान के सहयोग से एमडीएनआईवाई के दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित किया जा रहा है।

इस पाठ्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन पूज्य भिक्खु संघसेना, प्रधानमंत्री योग पुरस्कार विजेता और महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान केंद्र (एमआईएमसी) के संस्थापक अध्यक्ष द्वारा किया गया। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के आयुष, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की निदेशक डॉ. ताशी थिनलास विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (एनआईएसआर), लेह की निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट ने की।

डॉ. पद्म गुरमेट ने लद्दाख में आयोजित पहले योग कल्याण प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने छात्रों को प्रशिक्षण कार्यक्रम के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों भागों में सक्रिय रूप से भाग लेकर इस अवसर का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने लद्दाख में नागरिकों के कल्याण के लिए योग और ध्यान को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए पूज्य भिक्खु संघसेना के प्रति आभार व्यक्त किया और समाज के लाभ के लिए पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों और कल्याणकारी प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रति राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

डॉ. ताशी थिनलास ने योग शिक्षा के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने समग्र स्वास्थ्य और कल्याण प्राप्त करने के लिए आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक चिकित्सा और योग के एकीकरण के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में योग चिकित्सकों की संभावनाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र में योग को शामिल करने की योजना पर भी प्रकाश डाला।

पूज्य भिक्खु संघसेना ने योग को एक ऐसी जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक कल्याण को पोषित करती है। उन्होंने छात्रों को व्यक्तिगत विकास के लिए और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए ईमानदारी और समर्पण के साथ योग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को पाठ्यक्रम के दौरान महाबोधि ध्यान केंद्र में ध्यान करने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि योग और ध्यान एक दूसरे के पूरक हैं।

इससे पहले, पाठ्यक्रम समन्वयक गोपाल शर्मा ने छात्रों को कार्यक्रम की समय सारिणी और पाठ्यक्रम संबंधी दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी दी। उद्घाटन कार्यक्रम का समापन डोल्मा त्सेरिंग के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके साथ नव नामांकित प्रतिभागियों के लिए तीन माह के योग कल्याण प्रशिक्षक प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का औपचारिक प्रारंभ हुआ।

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