राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), ने जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के जेके लोन अस्पताल में इलाज के दौरान एक 10 वर्षीय बच्चे को गलत रक्त चढ़ाने की मीडिया की खबर पर स्वतः संज्ञान लिया है। बच्चे की हालत गंभीर बताई गई है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। बच्चे को 5 दिसंबर, 2024 और 7 दिसंबर, 2024 को दो अलग-अलग समूह के रक्त चढ़ाए गए था।
आयोग ने कहा है कि खबर में दी गई सूचना सही होने पर यह बच्चे के मानवाधिकार के गंभीर उल्लंघन का मामला है क्योंकि डॉक्टरों या चिकित्सा पेशेवरों की किसी भी लापरवाही से मरीजों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। कुछ महीने पहले जयपुर के इस अस्पताल में ऐसी ही लापरवाही से एक 23 वर्षीय मरीज की जान जाने का आरोप है। एक ही अस्पताल में रक्त आधान में लापरवाही के दो कथित मामले चौंकाने वाले और चिंता का विषय हैं क्योंकि यह मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। ऐसी लापरवाही करने वाले व्यक्तियों की पहचान करने और घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मामले की गहरी जांच जरूरी है।
स्थिति की गंभीरता देखते हुए मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इसपर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने रिपोर्ट में पीड़ित बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति, दर्ज प्राथमिकी, जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित को दिए गए मुआवजे इत्यादी की जानकारी भी देने को कहा है।
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