अंतर्राष्ट्रीय

सऊदी अरब ने हमले के बाद महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन बंद की, हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर बढ़ाया नियंत्रण

सऊदी अरब ने कहा है कि ड्रोन हमले के एक दिन बाद उसने देश भर में फैली एक बड़ी तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया है। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि हमले के बाद ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ को बंद कर दिया गया है। बयान में इस कदम को एहतियाती उपाय बताया गया है। ईरान और अमरीका-इज़राइल के बीच युद्ध के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में रुकावट आने के बाद भी सऊदी अरब द्वारा तेल का निर्यात जारी रखने में ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ ने अहम भूमिका निभाई है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस ड्रोन हमले के लिए इराक से आए कई ड्रोनों को ज़िम्मेदार ठहराया। जबकि इराक की सरकार ने हमले की निंदा की और इसकी जांच के आदेश दिए हैं।

यह तेल पाइपलाइन को ऐसे समय में बंद किया गया है, जब यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ‘बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य’ (जो लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर है) में मोखा बंदरगाह और पेरिम द्वीप पर कब्ज़ा कर लिया है, जिससे पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में एक नया मोर्चा खुल गया है।

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य’ दुनिया के प्रमुख शिपिंग मार्गों में से एक है। इस बढ़त से ईरान की उस रणनीति को बढ़ावा मिल सकता है, जिसके तहत वह अमरीका पर दबाव बनाने के लिए दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ाना चाहता है। सऊदी-समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन की सरकार के दो सूत्रों ने बताया कि उसकी सेना पेरिम से पीछे हट गई है और हूथियों ने लाल सागर के तट पर स्थित मुख्य भूमि के शहर धुबाब पर भी कब्ज़ा कर लिया है, जो इस द्वीप के ठीक सामने है।

गर हूथियों का ‘बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य’ पर नियंत्रण हो जाता है (जो अरब प्रायद्वीप में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दूसरी तरफ है), तो उनके समर्थक ईरान को अमेरिका के साथ युद्ध में एक अहम बढ़त मिल सकती है। इससे दूसरे बड़े कॉरिडोर के ज़रिए होने वाली सप्लाई कम हो सकती है और तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

दूसरी ओर, सऊदी अरब द्वारा बंद की गई एक हजार दो सौ किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, होर्मुज़ जलडमरू मध्यसे गुज़रे बिना इसके कच्चे तेल को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने का एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग है। हाल के महीनों में इसके ज़रिए हर दिन 40 से 50 लाख (4 से 5 मिलियन) बैरल तेल की आपूर्ति की जा रही थी, जो कुल वैश्विक सप्लाई का 4 से 5 प्रतिशत है।

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