संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि सैनिक शासन, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात पाकिस्तान जैसे देश ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की आलोचना करने का दुस्साहस किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय राजनयिक भाविका मंगलानंदन ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान ने लंबे समय से अपने पड़ोसियों के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इसने भारतीय संसद, भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई, बाजारों और तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाले मार्गों पर हमला किया है। ये सूची बहुत लंबी है। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा हिंसा को लेकर दूसरों की आलोचना करना पाखंड की पराकाष्ठा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के अविभाज्य और अभिन्न अंग, जम्मू-कश्मीर में चुनावों को बाधित करने के लिए लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल किया है। पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को उकसाने का परिणाम उसे भुगतना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह हास्यास्पद है कि एक देश जिसने 1971 में व्यापक नरसंहार किया था और अपने यहां अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार करता है वह असहिष्णुता के बारे में बोलने की हिमाकत कर रहा है। दुनिया देख रही है कि पाकिस्तान की हकीकत क्या है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र में आम बहस के दौरान शहबाज शरीफ द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने जवाब दिए जाने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ये बातें कहीं।
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