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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, “आज के दिन यानी 25 जनवरी को हमारे देश में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए हमारे व्यस्क नागरिक उत्साहपूर्वक मतदान करते हैं। बाबासाहब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनीतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है। हमारे मतदाता बाबासाहब की सोच के अनुरूप अपनी राजनैतिक जागरूकता का परिचय दे रहे हैं। मतदान में महिलाओं की बढ़ती हुई भागीदारी हमारे गणतंत्र का शक्तिशाली आयाम है। महिलाओं का सक्रिय और सशक्त होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है…हमारी बहनें और बेटियां पारंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं देश के समग्र विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं।”

राष्ट्रपति ने कहा, “लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने हमारे राष्ट्र का एकीकरण किया। पिछले वर्ष 31 अक्टूबर को कृतज्ञ देशवासियों ने उत्साह पूर्वक उनकी 150वीं जयंती मनाई। उनकी 150वीं जयंती के पावन अवसर से जुड़े स्मरण उत्सव बनाए जा रहे हैं। ये उत्सव देशवासियों में राष्ट्र एकता तथा गौरव की भावना को मजबूत बनाते हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण तक तथा पूर्व से लेकर पश्चिम तक, हमारी प्राचीन सांस्कृतिक एकता का ताना-बाना हमारे पूर्वजों ने बुना था। राष्ट्रीय एकता के स्वरूपों को जीवंत बनाए रखने का प्रत्येक प्रयास अत्यंत सराहनीय है। पिछले वर्ष 7 नवंबर से हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष संपन्न होने का उत्सव भी मनाया जा रहा है। भारत माता के देवी स्वरूप की वंदना का यह गीत जन-मन में राष्ट्र प्रेम का संचार करता है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “देश और विदेश में रहने वाले हम भारत के लोग उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मैं आप सभी को गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं। गणतंत्र दिवस का पावन पर्व हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर होता है। स्वाधीनता संग्राम के बल पर 15 अगस्त 1947 के दिन से हमारे देश की दशा बदली, भारत स्वाधीन हुआ, हम अपनी राष्ट्र नीति के निर्माता बने। 26 जनवरी 1950 के दिन से हम अपने गणतंत्र को संवैधानिक आदर्श की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उसी दिन हमने अपने संविधान को पूरी तरह से लागू किया। लोकतंत्र की जननी भारत भूमि उपनिवेश के विधि विधान से मुक्त हुई और हमारा लोक-तंत्रात्मक गणराज्य अस्तित्व में आया। हमारा संविधान विश्व इतिहास में आज तक के सबसे बड़े गणराज्य का आधारग्रंथ है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श हमारे गणतंत्र को परिभाषित करते हैं। संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रीयता की भावना तथा देश की एकता को संवैधानिक प्रावधानों सुदृढ़ आधार प्रदान किया है।”

उन्होंने कहा, “भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। विश्व पटल पर अनिश्चितता के बावजूद, भारत में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। हम निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में निवेश करके, हम अपनी आर्थिक संरचना का उच्च स्तर पर पुन:निर्माण कर रहे हैं। स्वाधीनता के बाद देश के आर्थिक एकीकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्णय, GST को लागू करने से, ‘एक राष्ट्र, एक बाज़ार’ की व्यवस्था स्थापित हुई है। GST प्रणाली को और भी प्रभावी बनाने के हाल के निर्णयों से हमारी अर्थव्यवस्था को और अधिक शक्ति मिलेगी। श्रम सुधारों के क्षेत्र में चार श्रम संहिताएँ जारी की गई हैं। इनसे हमारे श्रमिकों को लाभ होगा और उद्यमों के विकास में भी तेज़ी आएगी।”

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