राज्यसभा की स्वीकृति के साथ ही संसद ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह विधेयक पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करना है।
नया विधेयक विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाने और जन्म तथा मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना देने को प्रोत्साहित करने के लिए लाया गया है। विधेयक में प्रावधान है कि यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना पंजीयक को उसके घटित होने के एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो जन्म या मृत्यु की प्रामाणिकता के सत्यापन के बाद ही जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की स्वीकृति से इसका पंजीकरण किया जा सकता है।
विधेयक पर हुई बहस का उत्तर देते हुए नित्यानंद राय ने कहा कि विलंबित पंजीकरण के संभावित दुरुपयोग को देखते हुए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना पंजीयक को दो वर्ष से अधिक समय के बाद दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा। नित्यानंद राय ने कहा कि दो वर्ष से अधिक समय के विलंबित पंजीकरण के प्रावधान को छोड़कर, यह प्रणाली काफी हद तक अपरिवर्तित रहेगी।
नित्यानंद राय ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य स्पष्ट है, क्योंकि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे का विधिवत पंजीकरण हो। नित्यानंद राय ने कहा कि इसका उद्देश्य जन्मों के अनुचित पंजीकरण या निहित स्वार्थों के लिए किये जाने वाले हेरफेर जैसी अनियमितताओं को रोकना भी है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, प्रत्येक मृत्यु को भी समय पर विधिवत दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि अभिलेखों में दुरुपयोग या अनियमितताओं की कोई गुंजाइश न रहे।
नित्यानंद राय ने बताया कि देशभर में लगभग 35 लाख पंजीकरण इकाइयां कार्यरत हैं। नित्यानंद राय ने कहा कि देश में 2014 में जन्म पंजीकरण लगभग 86.6 प्रतिशत था, जो 2024 में बढ़कर 99 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसी प्रकार, मृत्यु पंजीकरण लगभग 72.5 प्रतिशत था जो , अब बढ़कर 99.4 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत सार्वभौमिक और सटीक जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा की दर्शना सिंह ने कहा कि जन्म और मृत्यु का पंजीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए पहचान का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुरूप इस प्रणाली को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए यह विधेयक पेश किया गया है। दर्शना सिंह ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रणाली का डिजिटलीकरण कर दिया गया है, जिससे अभिलेखों को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हाल के वर्षों में नागरिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
बीजू जनता दल (बीजेडी) सदस्य डॉ. संतृप्त मिश्रा ने विधेयक के उस प्रावधान पर चिंता व्यक्त की, जिसके अनुसार ऐसे मामलों को दो साल बाद प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अदालतें पहले से ही बड़ी संख्या में मामलों से बोझिल हैं और प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के मेदा रघुनाधा रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी भारत की नागरिक पंजीकरण प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत करने और पहचान धोखाधड़ी को रोकने के हर प्रयास का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि भारत की नागरिक पंजीकरण प्रणाली ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि 2000 से पहले, केवल लगभग 56 प्रतिशत जन्म और 48 प्रतिशत मृत्यु ही राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत होती थीं।
मेदा रघुनाधा रेड्डी ने कहा कि एक विश्वसनीय नागरिक पंजीकरण प्रणाली न केवल कानूनी पहचान के लिए बल्कि प्रभावी शासन, नीति नियोजन और सार्वजनिक सेवाओं के वितरण के लिए भी आवश्यक है। कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, टीएमसी की ममता ठाकुर, बीआरएस के रवि चंद्र वद्दीराजू और एआईएडीएमके के एम धनपाल सहित अन्य सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
विधेयक पारित होने के बाद राज्यसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
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