बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की महिला इकाई की वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी में महिलाओं को शीर्ष पद न देने के फैसले का समर्थन किया है। इन महिला नेताओं ने धार्मिक मान्यताओं के आधार पर सिर्फ़ पुरुषों के ही नेतृत्व वाली व्यवस्था को उचित ठहराया है। हालांकि इसकी कड़ी आलोचना हुई है और लोगों का मानना है कि इस तरह की सोच पुरुष प्रधान मानसिकता और लैंगिक समानता की उपेक्षा को दर्शाती है।
बांग्लादेश जमात–ए–इस्लामी की महिला शाखा की वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की उस नीति का बचाव किया है, जिसमें महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व पदों पर आने की अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि जमात एक इस्लामी संगठन है और उसका मानना है कि नेतृत्व की भूमिका पुरुषों के पास होनी चाहिए। महिला शाखा की सचिव नुरुन्निसा सिद्दिका ने कहा कि पुरुषों को महिलाओं का संरक्षक माना जाता है और पार्टी की मान्यताओं के अनुसार महिलाएं आमीर यानी प्रमुख नहीं बन सकतीं। ढाका और अन्य इलाकों में छात्रों, महिला संगठनों और राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारी सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं और जमात के कथित महिला–विरोधी विचारों के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत उर्वरक विभाग ने साफ कहा है…
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने सैनलाम इमर्जिंग मार्केट्स (मॉरीशस) लिमिटेड द्वारा श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी…
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने एनकैट होल्डिंग जीएमबीएचएम द्वारा प्यूमा एसई में कुछ शेयरधारिता के…
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली…
भारत सरकार ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए ऋण गारंटी योजना-2.0 (CGSMFI-2.0) की वैधता को…
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राईफेड) के माध्यम से आज…