अमेरिका और ईरान के बीच कमजोर संघर्ष विराम के लाईफ सपोर्ट पर होने के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टिप्पणी के बाद राजनयिक तनाव गहरा गया है। इससे तेल बाजारों को झटका लगा है। अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया में अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाने, ईरान की फ्रीज परिसंपत्तियां खोलने, अमेरिकी नाकाबंदी समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी प्रबंधन को मान्यता देने की मांग की थी। लेकिन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इन शर्तों को नामंजूर कर दिया था। शांति प्रस्ताव खारिज होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है।
ईरान की मांगें मुख्य रूप से युद्धकालीन परिस्थितियों और आर्थिक दबावों पर केंद्रित रही हैं, न कि तत्काल परमाणु रियायतों पर। लेकिन फिलहाल अमेरिका इन मांगें को मानने के पक्ष में नहीं है। मध्यस्थ लगातार साझा समाधान खोजने की कोशिश में हैं, लेकिन युद्ध के दबाव और आर्थिक संकट के कारण स्थिति और जटिल होती जा रही है।
इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों पर अपनी प्रतिक्रिया तय कर रहा है उसने एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य देश पर दो हजार आठ सौ से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमलों से हुए नुकसान का दस्तावेज़ीकरण करना है। संयुक्त अरब अमीरात अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी जवाबदेही तय करने और अपने प्रमुख स्थलों तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों के लिए मुआवज़े की मांग करने की तैयारी कर रहा है।
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