केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज भारत मंडपम में न्यू मैंगलूर पत्तन प्राधिकरण (एनएमपीए) के स्वर्ण जयंती समारोह के पूर्वावलोकन समारोह का उद्घाटन किया।
इस उपलब्धि को चिह्नित करने के लिए, मंत्री ने भारत के बंदरगाह बुनियादी ढाँचे, रसद दक्षता और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आठ प्रमुख समुद्री विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इन परियोजनाओं में अत्याधुनिक क्रूज़ टर्मिनल, आधुनिक कवर्ड स्टोरेज सुविधाएँ, 150 बिस्तरों वाला मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल, विस्तारित ट्रक टर्मिनल और उपयोगकर्ता अनुभव और परिचालन क्षमता में सुधार के लिए डिज़ाइन किया गया उन्नत बंदरगाह पहुँच बुनियादी ढाँचा शामिल है।
सर्बानंद सोनोवाल ने भारत के समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय विकास में बंदरगाह के पाँच दशकों के योगदान का उत्सव मनाने के लिए स्मारक डाक टिकट, स्मारक सिक्का और एनएमपीए का आधिकारिक स्वर्ण जयंती गान भी जारी किया।
इस अवसर पर सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “आज का दिन हम सभी के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। 1975 में स्थापित हमारा नौवाँ प्रमुख बंदरगाह, न्यू मैंगलोर बंदरगाह, इस क्षेत्र में आयातकों और निर्यातकों के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। अपने शुरुआती वर्षों में केवल कुछ हज़ार टन माल की ढुलाई से, यह पिछले वित्तीय वर्ष में 46.01 मिलियन टन तक पहुँच गया है, जिसकी कुल क्षमता 104 मिलियन टन प्रति वर्ष है। एक नया डीप-ड्राफ्ट जनरल कार्गो बर्थ भी निर्माणाधीन है और जल्द ही इसका संचालन शुरू हो जाएगा।”
भारत के दीर्घकालिक लक्ष्यों पर विचार करते हुए, उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’ की ओर बढ़ रहे हैं, हमारे बंदरगाह भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनने के लिए, हमें 2047 तक विकसित आत्मनिर्भर समुद्री राष्ट्र भी बनना होगा।”
बंदरगाह मंत्री ने सतत और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी विकास की आवश्यकता पर बल दिया और हरित परिचालन की दिशा में एनएमपीए के प्रयासों की सराहना की। सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “अर्थव्यवस्था को पारिस्थितिकी और पर्यावरण की कीमत पर नहीं बढ़ना चाहिए। एनएमपीए की हरित पहल सराहनीय हैं। बंदरगाह ने स्थिरता को मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाया है और अपने परिचालनों में पर्यावरण के प्रति जागरूक परिपाटियों को एकीकृत करना जारी रखा है।”
मंत्री ने इस बात की जानकारी दी कि भारत के बंदरगाह वैश्विक मानकों के अनुरूप स्मार्ट, टिकाऊ और प्रौद्योगिकी-संचालित प्रवेश द्वारों में बदल रहे हैं। ‘हरित सागर दिशानिर्देश’, ‘हरित टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम’, ‘हरित नौका योजना’ और ‘हरित शिपिंग कॉरिडोर’ जैसी पहल भारत के स्वच्छ-ईंधन, इलेक्ट्रिक-पोत और हरित समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को गति दे रही हैं।
समुद्री क्षेत्र में एक दशक के परिवर्तन का ज़िक्र करते हुए, मंत्री ने कहा कि भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “अभूतपूर्व प्रगति” की है। समुद्री अमृत काल विज़न 2047, नीली अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप, भारत की समुद्री क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए दीर्घकालिक रूपरेखा तैयार करता है। इसमें सागरमाला कार्यक्रम के माध्यम से लाखों रोज़गार सृजित करने हेतु ₹80 लाख करोड़ के नियोजित निवेश का अनुमान है।
सागरमाला के अंतर्गत, 2035 तक ₹5.8 लाख करोड़ की 840 परियोजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं। इनमें से ₹1.41 लाख करोड़ की 272 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, जबकि ₹1.65 लाख करोड़ की 217 परियोजनाएँ वर्तमान में प्रगति पर हैं।
एनएमपीए के तहत शुरू की गई आठ नई परियोजनाओं में शामिल हैं:
इस वर्ष के अंत में एनएमपीए की स्वर्ण जयंती मनाई जाएगी, जो भारत के समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय विकास को आगे बढ़ाने में बंदरगाह की भूमिका के 50 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया जिनमें संयुक्त सचिव (पत्तन) आर. लक्ष्मणन और न्यू मैंगलूर पत्तन प्राधिकरण (एनएमपीए) के अध्यक्ष डॉ. वेंकट रमण अक्काराजू, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।
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