विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कहा है कि उच्च शिक्षा संस्थानों को सभी निरस्त दाखिलों या माइग्रेशन के मामले में 30 सितंबर तक पूरी फीस लौटानी होगी। आयोग की यह नीति चालू शिक्षा सत्र के लिए है। आयोग ने यह कदम दाख़िला रद्द करने या नाम वापस लेने पर फीस लौटाने के संबंध में छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों को देखते हुए उठाया है। यह नीति केंद्रीय या राज्य अधिनियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों, आयोग से मान्यता-प्राप्त संस्थानों, सम-विश्वविद्यालयों और दाखिला परामर्श में शामिल संगठनों पर लागू रहेगी। आयोग ने यह भी कहा कि इस वर्ष 30 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच रिफंड जारी किया जाएगा और प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में अधिकतम एक हजार रुपये की कटौती की जा सकेगी। 31 अक्टूबर के बाद के दाखिले के लिए, अक्टूबर-2018 के प्रावधान लागू होंगे। आयोग ने कहा है कि इस नीति का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दुबई तट पर ईरान के ड्रोन हमले में कुवैत का तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो गया…
असम में 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाताओं और दिव्यांगजनों के लिए घर…
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा बड़ी संख्या में प्रशासनिक और…
बिहार में आज सुबह नालंदा जिले के बिहार शरीफ स्थित मघडा शीतलाष्टमी मंदिर में धार्मिक…
नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) के पांचवें और इस श्रेणी के दूसरे युद्धपोत, दूनागिरी (यार्ड 3023),…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर गुजरात में गांधीनगर…