विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कहा है कि उच्च शिक्षा संस्थानों को सभी निरस्त दाखिलों या माइग्रेशन के मामले में 30 सितंबर तक पूरी फीस लौटानी होगी। आयोग की यह नीति चालू शिक्षा सत्र के लिए है। आयोग ने यह कदम दाख़िला रद्द करने या नाम वापस लेने पर फीस लौटाने के संबंध में छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों को देखते हुए उठाया है। यह नीति केंद्रीय या राज्य अधिनियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों, आयोग से मान्यता-प्राप्त संस्थानों, सम-विश्वविद्यालयों और दाखिला परामर्श में शामिल संगठनों पर लागू रहेगी। आयोग ने यह भी कहा कि इस वर्ष 30 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच रिफंड जारी किया जाएगा और प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में अधिकतम एक हजार रुपये की कटौती की जा सकेगी। 31 अक्टूबर के बाद के दाखिले के लिए, अक्टूबर-2018 के प्रावधान लागू होंगे। आयोग ने कहा है कि इस नीति का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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