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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में दार्जिलिंग के युवा प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में दार्जिलिंग के युवा प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और राष्ट्र के प्रति महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र से आए युवा प्रतिभाओं का स्वागत करना अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि ये युवा आत्मविश्वास से भरपूर और प्रगतिशील भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक हैं। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद हर्ष वर्धन श्रृंगला भी उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को इसकी सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक बताते हुए कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना युवा नागरिकों से नवाचार, ईमानदारी और उद्यमशीलता के साथ योगदान देने का आह्वान करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आत्मनिर्भरता हमारी क्षमताओं में विश्वास और हमारी विरासत पर गर्व को दर्शाती है।

इस संवाद के दौरान छात्रों ने प्रवासन, टिकाऊ पर्यटन, आपदा प्रबंधन, दार्जिलिंग की चाय और खेल अवसंरचना से संबंधित प्रश्न उठाए। प्रवासन के विषय पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आर्थिक आकांक्षाओं से प्रेरित एक वैश्विक घटना है, लेकिन उन्होंने पहचान, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर बल दिया। टिकाऊ पर्यटन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल जिम्मेदार विकास पर बल दिया।

पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने आपदा से निपटने की बेहतर तैयारी, उन्नत बुनियादी ढांचे और समन्वित प्रयासों के महत्व पर बल दिया, जिनमें आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी पहलें शामिल हैं। उन्होंने दार्जिलिंग चाय की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी स्वीकार किया और मूल्यवर्धन एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया। खेलों के संदर्भ में, उन्होंने जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को पोषित करने के लिए एकीकृत बुनियादी ढांचे और संस्थागत सहयोग की जरूरत पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को पारंपरिक वेशभूषा में देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे उन लोगों का बहुत सम्मान करते हैं जो अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए सचेत प्रयास करते हैं। उन्होंने युवाओं से बदलते विश्व में अवसरों को अपनाते हुए अपनी विरासत से जुड़े रहने का आग्रह किया और विश्वास व्यक्त किया कि वे राष्ट्र निर्माण और विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण में सार्थक योगदान देंगे।

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