सैन्य चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (एएचआरआर) 28 अगस्त, 2025 को अत्याधुनिक एएलएलवाई अडैप्टिव मोतियाबिंद उपचार प्रणाली का उपयोग करके रोबोटिक कस्टम लेज़र मोतियाबिंद सर्जरी करने वाला भारत का पहला और दक्षिण एशिया का दूसरा सरकारी संस्थान बन गया। यह उपलब्धि नेत्र रोग विभाग की पहली फेम्टो-सेकंड लेज़र असिस्टेड मोतियाबिंद सर्जरी (एफएलएसीएस) के साथ रोबोटिक, ब्लेडलेस और कंप्यूटर-निर्देशित नेत्र शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में सफल प्रवेश का प्रतीक है।
यह सर्जरी ब्रिगेडियर एस.के. मिश्रा ने एक 61 वर्षीय रोगी पर की। यद्यपी पारंपरिक सर्जरी अब भी प्रभावी है, एफएलएसीएस एक प्रमुख प्रौद्योगिकिय प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि फेमटोसेकंड लेज़र सर्जरी के महत्वपूर्ण चरणों, जैसे कॉर्निया चीरा, कैप्सूलोटॉमी और मोतियाबिंद विखंडन को माइक्रोन-स्तर की सटीकता के साथ स्वचालित करता है।
एएचआरआर में इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का समेकन सशस्त्र बलों की अपने कर्मियों और उनके परिवारों को सबसे उन्नत, सुरक्षित और प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। एफएलएसीएस सटीकता और सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करता है, जो सैन्य चिकित्सा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन के मार्गदर्शन में, एएचआरआर में नेत्र विज्ञान विभाग आंखों की देखभाल में नैदानिक उत्कृष्टता और नवोन्मेषण की अपनी विरासत को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।
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