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कैबिनेट ने भारत के साथ ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के लिए दिशा-निर्देशों में बदलाव को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों (एलबीसी) से होने वाले निवेश के दिशानिर्देशों में बदलाव को मंजूरी दे दी।

मौजूदा नीति की समीक्षा की गई है और इसमें निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:

क. ‘बेनेफिशियल ओनर’ (वास्तविक स्वामी-बीओ) की परिभाषा और उसके निर्धारण के मानदंड शामिल करना।

यह संशोधन वास्तविक स्वामित्व की एक ऐसी परिभाषा और निर्धारण के मानदंड प्रदान करता है जो निवेश समुदाय द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, और जो धन शोधन निवारण नियम, 2003 के अंतर्गत आते हैं।

वास्तविक स्वामित्व की जांच निवेशक इकाई के स्तर पर लागू की जाएगी।

जिन निवेशकों में जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की गैर-नियंत्रक बेनेफिशियल ओनरशिप 10 प्रतिशत तक है, उन्हें स्वचालित मार्ग के तहत अनुमति दी जाएगी, बशर्ते कि संबंधित क्षेत्रीय सीमा, प्रवेश मार्ग और अन्य लागू शर्तों का पालन किया जाए। ऐसे निवेशों के मामले में निवेश प्राप्त करने वाली कंपनी को संबंधित जानकारी/विवरण उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को रिपोर्ट करना होगा।

ख. विशिष्ट क्षेत्रों में निवेश के लिए त्वरित स्वीकृति–

इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, पॉलीसिलिकॉन तथा इन्गट-वेफर के निर्माण से संबंधित निर्दिष्ट क्षेत्रों/गतिविधियों में एलबीसी निवेश के प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर संसाधित कर निर्णय लिया जाएगा।

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सीओएस आवश्यकतानुसार निर्दिष्ट क्षेत्रों की सूची में संशोधन भी कर सकती है।

इन मामलों में निवेश प्राप्त करने वाली इकाई में बहुसंख्यक शेयरधारिता और नियंत्रण हमेशा भारतीय निवासी नागरिकों और/या भारतीय निवासी संस्था के पास होगा, जिसका स्वामित्व और नियंत्रण भारतीय निवासी नागरिक के हाथ में होगा।

पृष्‍ठभूमि

कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय कंपनियों के मौकापरस्त नियंत्रण/अधिग्रहण पर अंकुश लगाने के लिए, सरकार ने 17.04.2020 के प्रेस नोट 3 (2020) (पीएन3) के माध्यम से मौजूदा एफडीआई नीति में संशोधन किया था। पीएन3 के अनुसार, भारत के साथ ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देश की कोई भी इकाई, या जहाँ भारत में होने वाले निवेश का वास्तविक मालिक ऐसे किसी देश में स्थित हो या उसका नागरिक हो, वह केवल सरकारी मार्ग के तहत ही निवेश कर सकता है। इसके अतिरिक्त, भारत में किसी इकाई में मौजूद या भविष्य के किसी भी एफडीआई के स्वामित्व के हस्तांतरण के मामले में, यदि इससे वास्तविक स्वामित्व उपरोक्त अधिकार क्षेत्र के दायरे में आता है, तो उसके लिए भी सरकारी स्वीकृति आवश्यक होगी।

पीएन3 के प्रतिबंधों को उन मामलों में भी लागू किया जाना, जहां एलबीसी निवेशकों की केवल गैर-रणनीतिक और गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी होती है, निवेश प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव डालता हुआ देखा गया, जिसमें प्राइवेट इक्विटी (पीई) और वेंचर कैपिटल (वीसी) जैसे वैश्विक फंड भी शामिल हैं।

लाभ :

यह अपेक्षा की जाती है कि नए दिशानिर्देश भारत में स्पष्टता और कारोबार में सुगमता को बढ़ावा देंगे तथा ऐसे निवेश को प्रोत्साहित करेंगे जो अधिक एफडीआई प्रवाह, नई तकनीकों तक पहुंच, घरेलू मूल्य संवर्धन, भारतीय कंपनियों के विस्तार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने में योगदान दे सकें। इससे भारत को एक पसंदीदा निवेश और विनिर्माण गंतव्य के रूप में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता का बेहतर उपयोग करने और उसे और मजबूत करने में मदद मिलेगी। एफडीआई प्रवाह में वृद्धि से घरेलू पूंजी को मजबूती मिलेगी, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के उद्देश्यों को समर्थन मिलेगा और समग्र आर्थिक विकास को गति प्रदान करने में सहायक होगा।

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