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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने चार सशस्त्र बल कर्मियों को मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल पुरस्कार से सम्मानित किया

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सैन्य खुफिया टोही कार्यों, जांच-पड़ताल और साहसिक गतिविधियों के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 16 अप्रैल, 2025 को सशस्त्र बल के चार कर्मियों को मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल पुरस्कार से सम्मानित किया। यह समारोह नई दिल्ली स्थित यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में आयोजित किया गया। वर्ष 2023 के मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल विजेताओं में भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर डी पांडा और भारतीय नौसेना से ईए (रि.) राहुल कुमार पांडे शामिल थे। भारतीय नौसेना के सीएचईए (आर) राम रतन जाट और भारतीय वायु सेना से सार्जेंट झूमर राम पूनिया को वर्ष 2024 के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मैकग्रेगर मेमोरियल मेडल पुरस्कार की शुरुआत 3 जुलाई, 1888 को हुई थी। इस सम्मान को वर्ष 1870 में स्थापित यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के संस्थापक मेजर जनरल सर चार्ल्स मेटकाफ मैकग्रेगर, केसीबी, सीएसआई, सीआईई की स्मृति में प्रदान किया जाता है। मूल रूप से सैन्य जासूसी कार्यों और खोजपूर्ण यात्राओं के कार्यों को सम्मान देने के उद्देश्य से प्रारंभ किये गए इस पदक का दायरा स्वतंत्रता के बाद साल 1986 में सैन्य अन्वेषण अभियानों और साहसिक गतिविधियों को शामिल करने के लिए बढ़ा दिया गया था।

वैसे तो इस पुरस्कार के लिए सैन्य टोही कार्यों और जांच-पड़ताल सर्वोपरि मानदंड बने हुए हैं, फिर भी यह सम्मान सशस्त्र बलों, प्रादेशिक सेना, रिजर्व बलों, राष्ट्रीय राइफल्स तथा असम राइफल्स के सभी रैंकों (सेवारत व सेवानिवृत्त) के लिए भी दिया जाता है। आज तक 127 पदक प्रदान किये जा चुके हैं, जिनमें से 103 आजादी से पहले ही दिए गये थे।

इस महत्वपूर्ण पुरस्कार से सम्मानित होने वाले प्रमुख प्राप्तकर्ताओं में कैप्टन एफई यंगहसबैंड (1890), मेजर जनरल ऑर्डे चार्ल्स विंगेट (1943), मेजर जेडसी बख्शी, वीआरसी (1949), सियाचिन ग्लेशियर में टोही अभियान चलाने वाले कर्नल नरिंदर कुमार (1978-81) और कमांडर दिलीप डोंडे तथा लेफ्टिनेंट कमांडर अभिलाष टॉमी को उनकी एकल वैश्विक परिक्रमा के लिए शामिल हैं। यह सम्मान सशस्त्र बलों के कार्मिकों को साहसिक कार्य करने और वीरता, दृढ़ता तथा खोज की परंपरा को कायम रखने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करता है।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने ब्रेवेस्ट ऑफ द ब्रेव नामक पुस्तक का विमोचन भी किया, जो नायब सूबेदार चुन्नी लाल, एसी, वीआरसी, एसएम के जीवन और उनकी वीरतापूर्ण यात्रा पर एक प्रेरणादायक वृत्तांत है। जनरल अनिल चौहान ने लेखक और पूर्व चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (सीआईएससी) लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ (सेवानिवृत्त) की भी सराहना की, जिन्होंने एक सैनिक की व्यक्तिगत उथल-पुथल, विपरीत परिस्थितियों में उसके अडिग संकल्प और अदम्य भावना का जीवंत व हृदयस्पर्शी चित्रण किया है। यह पुस्तक एक वीर सैनिक के प्रति मार्मिक श्रद्धांजलि अर्पित करती है और पुरुष तथा महिला सैन्य कर्मियों द्वारा की गई निस्वार्थ सेवा की याद दिलाती है।

यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में आयोजित पुरस्कार समारोह में खोजबीन, बहादुरी व राष्ट्र की सेवा में भारतीय सशस्त्र बलों की स्थायी विरासत का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया और साथ ही उन कथानकों का भी का स्मरण कराया गया, जो भावी पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

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