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DPIIT ने स्वास्थ्य सेवा नवाचार इको-सिस्टम को मजबूत करने के लिए फाइजर लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत के स्वास्थ्य सेवा नवाचार इको-सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने फाइजर लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस सहयोग का उद्देश्य स्टार्टअप्स को वित्तीय और गैर-वित्तीय, दोनों तरह की सहायता प्रदान करके अभिनव स्वास्थ्य सेवा उत्पादों को प्रयोगशाला से बाज़ार तक की यात्रा को गति प्रदान करना है। इस साझेदारी के तहत, पीफाइजर इन्डोवेशन प्रोग्राम, डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को सशक्त बनाने के लिए 60 लाख रुपये तक के अनुदान राशि मुहैया कराएगा। इसके साथ ही सोशल अल्फा द्वारा संचालित 18 महीने का एक विशेष इनक्यूबेशन प्रोग्राम (व्यापार या स्टार्टअप को शुरुआती अवस्था में समर्थन) भी चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम नैदानिक ​​सत्यापन, नियामक अनुमोदन और बाज़ार में प्रवेश की रणनीतियों को कवर करते हुए समर्पित गति देना वाला ट्रैक प्रदान करेगा। स्टार्टअप्स को चेन्नई स्थित फाइजर के अनुसंधान एवं विकास केंद्रों में अनुभव के अलावा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बुनियादी ढांचे और वैश्विक नेटवर्क तक भी पहुंच प्राप्त होगी। इससे स्टार्टअप्स उन्नत उद्योग अंतर्दृष्टि के साथ नवाचारों को मज़बूत कर सकेंगे।

यह पहल स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, स्वास्थ्य निगरानी और उपचार में नवाचार करने वाले 14 अग्रणी मेडटेक स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करेगी। इसमें गैर-संचारी रोगों, ऑन्कोलॉजी, मस्तिष्क स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस अवसर पर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव संजीव ने कहा कि भारत को नवीन औषधि खोज की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है और इस कार्य में स्टार्टअप्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

फाइजर इंडिया के वरिष्ठ निदेशक – वैश्विक नीति और सार्वजनिक मामले, शरद गोस्वामी ने भारतीय स्टार्टअप्स को देश की आवश्यकताओं के अनुरूप रोगी-केंद्रित, प्रभावशाली स्वास्थ्य सेवा समाधान विकसित करने में सक्षम बनाने के लिए फाइजर की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

यह समझौता ज्ञापन प्रभावशाली सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए DPIIT की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह समझौता समावेशी विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा नवाचार के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।

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