राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्वतः हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप विदेश मंत्रालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए थाईलैंड में पिछले छह महीनों से अपने नियोक्ता द्वारा यातना झेल रहे छह भारतीय श्रमिकों को छुड़ाया है। विदेश मंत्रालय को एनएचआरसी के 20 फरवरी 2026 को पत्र भेजे जाने के अगले ही दिन ही उनमें से चार श्रमिकों को भारत वापस लाया गया। वे बैंकॉक से अपने नियोक्ता द्वारा बुक की गई उड़ान से कोलकाता पहुंचे।
विदेश मंत्रालय के दक्षिणी प्रभाग ने सूचित किया है कि वह शेष दो बचाए गए श्रमिकों की स्वदेश वापसी के मामले को थाई आव्रजन अधिकारियों के साथ आगे बढ़ा रहा है क्योंकि वे अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक रुके हुए थे।
गौरतलब है कि 20 फरवरी 2026 को आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय से पूछा था कि क्या वह छह बंधक श्रमिकों के परिवारों को कोई सहायता प्रदान कर सकता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से सूचना मिलते ही विदेश मंत्रालय के दक्षिणी प्रभाग ने थाई अधिकारियों से उन्हें छुड़ाने का अनुरोध किया और उस कंपनी के मालिक से भी संपर्क किया, जहां कथित तौर पर ये छह श्रमिक काम कर रहे थे।
मीडिया में 17 फरवरी 2026 को एक वीडियो सामने आया था जिसमें ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के मजदूरों ने अपनी दुर्दशा बयां की थी। बैंकॉक के पास एक कारखाने में उनके मालिक ने उन्हें बंधक बनाकर रखा था और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक यातनाएं दी जा रहीं थी। उन्हें प्लाईवुड कारखाने में बिना वेतन और उचित भोजन के प्रतिदिन 12 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके मालिक ने उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए थे।
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