केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाओं से संबंधित विज्ञापनों के नियमन को सुदृढ़ करने के लिए औषधि नियम, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित संशोधन अनुसूची एच, अनुसूची एच1 और अनुसूची एक्स के अंतर्गत निर्दिष्ट दवाओं के विज्ञापन के लिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति की मौजूदा आवश्यकता को दवाओं की बिक्री और वितरण के लाइसेंस धारक संस्थाओं तक विस्तारित करने का प्रयास करता है।
औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) के साथ परामर्श के बाद मसौदा संशोधन को राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 861 (ई), दिनांक 28 सितंबर 2026 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है।
मौजूदा नियामक ढांचे के तहत दवा निर्माताओं को केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना अनुसूची एच, अनुसूची एच1 और अनुसूची एक्स के अंतर्गत आने वाली दवाओं का विज्ञापन करने से प्रतिबंधित किया गया है। संबंधित प्रावधानों में हालांकि इन दवाओं की खुदरा और थोक बिक्री एवं वितरण में लगी संस्थाओं को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है।
इस नियामकीय अंतर को दूर करने के लिए मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 के नियम 65 के तहत उप-नियम (22) को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है जिसमें खुदरा और थोक औषधि लाइसेंस धारकों सहित, दवाओं की बिक्री, भंडारण, प्रदर्शन या बिक्री के लिए पेशकश करने या वितरण करने के लाइसेंस धारकों तक विज्ञापन प्रतिबंध का विस्तार किया गया है।
प्रस्तावित प्रावधान के तहत अनुसूची एच, अनुसूची एच1 या अनुसूची एक्स में निर्दिष्ट दवाओं का कोई भी विज्ञापन केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य दवा आपूर्ति श्रृंखला में नियामक निरीक्षण को मजबूत करना, चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाओं के अनधिकृत प्रचार को हतोत्साहित करना और खुद उपचार करने के अनुचित जोखिमों को कम करना है।
इस उपाय से उन दवाओं से संबंधित सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की उम्मीद है जिनके लिए उचित चिकित्सा पर्यवेक्षण की आवश्यकता होती है जिनमें कुछ एंटीबायोटिक्स, मनोरोग संबंधी दवाएं और अन्य केवल डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली दवाएं शामिल हैं।
यह प्रस्ताव 16 फरवरी, 2026 को आयोजित औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड की 93वीं बैठक की सिफारिशों के बाद आया है जिसमें दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस धारकों द्वारा विज्ञापनों को नियंत्रित करने वाले उचित प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार किया गया था।
मंत्रालय ने मसौदा नियमों वाले राजपत्र की प्रतियां सार्वजनिक किए जाने की तिथि से 30 दिनों के भीतर हितधारकों और आम जनता से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। निर्धारित अवधि के भीतर प्राप्त सुझावों पर संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले केंद्र सरकार द्वारा विचार किया जाएगा।
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