हाइपरलूप एक उभरती हुई तकनीक है और अभी विकास के शुरुआती चरण में है। हाइपरलूप के तकनीकी और सुरक्षा मापदंडों को अभी दुनिया भर में तैयार किया जाना बाकी है। हाइपरलूप के अन्य परिवहन साधनों की तुलना में अधिक तेज, अधिक ऊर्जा कुशल और टिकाऊ होने की उम्मीद है। एक पहल के रूप में, रेल मंत्रालय के तहत एक इकाई, अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) ने इस तकनीक के सत्यापन के लिए आईआईटी/मद्रास में भविष्य के पूर्ण पैमाने के हाइपरलूप के पॉड, टेस्ट ट्रैक और वैक्यूम ट्यूब सुविधा के सब-स्केल मॉडल के विकास के उद्देश्य से हाइपरलूप प्रौद्योगिकी के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए 20.89 करोड़ रुपये के वित्तपोषण के साथ आईआईटी/मद्रास के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति…
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी आज देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ…
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान…
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) और कपड़ा मंत्रालय…
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बाढ़ की स्थिति का जायजा…