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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 नवंबर को पीएम-किसान योजना की 21वीं किस्त जारी करेंगे

पीएम किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना, प्रत्येक पात्र किसान परिवार को 6,000 रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना 24 फरवरी, 2019 को शुरू की गई केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। अब तक, देश के 11 करोड़ से ज़्यादा किसान परिवारों को 20 किश्तों के माध्यम से 3.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। इस योजना का लाभ उन किसानों को मिल रहा है जिनकी भूमि का विवरण पीएम किसान पोर्टल पर दर्ज है, जिनके बैंक खाते आधार से जुड़े हैं और जिनका ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। यह योजना वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पहलों में से एक है, जो लाभार्थियों को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करने के अपने महत्वपूर्ण प्रभाव को रेखांकित करती है। समावेशिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ, यह योजना अपने लाभों का 25 प्रतिशत से अधिक महिला लाभार्थियों को समर्पित करती है।

यह योजना तकनीकी और प्रक्रियागत प्रगति का लाभ उठाती है ताकि अधिकतम लाभार्थियों को बिना किसी परेशानी के लाभ मिल सके। किसान-केंद्रित डिजिटल बुनियादी ढांचा व्यापक पहुंच सुनिश्चित करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि देश के पात्र किसान इस योजना का लाभ निर्बाध रूप से उठा सकें। डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के रणनीतिक समावेश ने न केवल बिचौलियों को समाप्त किया है, बल्कि दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचने वाली एक सुव्यवस्थित वितरण प्रणाली का मार्ग भी प्रशस्त किया है। आधार और आधार-आधारित भुगतान इकोसिस्टम के उपयोग से योजना की प्रभावशीलता और भी बढ़ गई है, जिससे सुरक्षित और कुशल लेनदेन सुनिश्चित होते हैं।

पीएम-किसान योजना में लाभार्थियों की ई-केवाईसी पूरी करके उनकी पहचान स्थापित करने के लिए आधार एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। अब किसान निम्नलिखित विकल्पों में से किसी एक का उपयोग करके अपना ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं:

  1. ओटीपी आधारित ई-केवाईसी
  2. बायोमेट्रिक आधारित ई-केवाईसी
  3. फेशियल ऑथेंटिकेशन-आधारित ई-केवाईसी

किसान-केंद्रित डिजिटल बुनियादी ढांचे ने यह सुनिश्चित किया है कि इस योजना का लाभ बिचौलियों के बिना देश भर के सभी किसानों तक पहुंचे।

अपने मूल स्वरूप को मजबूत करने के लिए, इस योजना में कई तकनीकी हस्तक्षेप किए गए हैं।

डिजिटलीकरण के माध्यम से किसानों का सशक्तीकरण हो रहा है। देश के प्रत्येक गांव में किसानों को मदद मिल रही है। “तकनीक किसानों के घर-घर पहुंच रही है।” इसका एक उदाहरण पीएम-किसान मोबाइल ऐप है – लाभार्थियों को सीधी सेवाएं प्रदान करने के लिए पीएम-किसान मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है। इसके अलावा, किसानों के ई-केवाईसी सत्यापन के लिए आधार के माध्यम से फेशियल ऑथेंटिकेशन सुविधा का उपयोग किया जा रहा है, जिससे किसान अपने कमरे में बैठकर ही फेशियल ऑथेंटिकेशन के माध्यम से अपना और अन्य किसानों का ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं।

अधिक सुविधा के लिए, किसान समर्पित पोर्टल pmkisan.gov.in पर जा सकते हैं। “किसान कॉर्नर” सेक्शन के अंतर्गत, पीएम किसान योजना का लाभ पाने वाले लोग नए “अपनी स्थिति जानें” फ़ीचर का उपयोग करके आसानी से अपनी स्थिति की जांच कर सकते हैं। यह पोर्टल किसानों के लिए एक त्वरित और आसान स्व-पंजीकरण प्रक्रिया भी प्रदान करता है। सुगमता सुनिश्चित करने के लिए, पंजीकरण नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर भी किया जा सकता है और किसान अपने घर पर ही इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) में आधार-आधारित बैंक खाते भी खोल सकते हैं।

पीएम किसान योजना के महत्व को देखते हुए, पीएम किसान पोर्टल और केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) पर शिकायत निवारण प्रणाली उपलब्ध कराई गई है। किसान अपनी समस्याओं को सीधे पीएम-किसान पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं और त्वरित एवं समय पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

किसानों को वास्तविक समय में शिकायतों का समाधान करने के लिए, किसान-ई-मित्र चैटबॉट भी उपलब्ध कराया गया है। यह तकनीकी और भाषाई बाधाओं को दूर करता है और किसानों को अपनी भाषा में अपनी समस्याओं का समाधान करने की सुविधा प्रदान करता है।

लार्ज लैंग्वेज तकनीक द्वारा संचालित यह चैटबॉट किसानों को कई लाभ प्रदान करता है जैसे: किसान-ईमित्र की मुख्य विशेषताएं और सेवाएं:

  • पसंदीदा भाषाओं में 24/7 पहुंच: हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, बंगाली, ओडिया, मलयालम, गुजराती, पंजाबी, तेलुगु, मराठी और कन्नड़ सहित 11 प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं का सहयोग से तकनीकी और भाषाई बाधाओं को दूर करता है।
  • वे अपने आवेदन की स्थिति की जांच कर सकते हैं, अपने भुगतान के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं, और अपनी पसंदीदा भाषा में बातचीत कर सकते हैं।
  • स्वचालित भाषा पहचान (एएलडी): चैटबॉट ध्वनि इनपुट के आधार पर 11 प्रमुख भाषाओं का स्वतः पता लगा सकता है। अन्य भाषाओं के लिए, उपयोगकर्ताओं को शुरुआत में अपनी प्राथमिकताएं चुननी होंगी, और भविष्य के अपडेट में एएलडी की पूरी कवरेज का विस्तार किया जाएगा।
  • स्वचालित योजना पहचान (एएसडी): उपयोगकर्ता की पहली जिज्ञासा के आधार पर, सिस्टम स्वचालित रूप आसान योजना की पहचान करेगा, जिससे किसानों के लिए प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
  • स्पर्श-मुक्त प्रणाली: उपयोग में आसानी के लिए शारीरिक संपर्क के बिना बातचीत को सक्षम बनाती है।
  • किसान की मंशा के आधार पर कार्य करता है (यहां तक ​​कि एक छोटा विचार या प्रश्न भी किसानों को सटीक जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है)।
  • आवाज संपर्क विकल्प: किसानों को पुरुष या स्त्री आवाज के बीच चयन करने की सुविधा देता है, जिससे उन्हें व्यक्तिगत अनुभव मिलता है।
  • बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) द्वारा संचालित: सटीक, संदर्भ-संवेदनशील प्रतिक्रियाएं प्रदान करने के लिए चैटबॉट की क्षमता को बढ़ाता है।
  • यूआरएल (kisanemitra.gov.in) पर काम करना – एक स्वतंत्र पहचान देना।

सरकार ने पीएम किसान योजना के अंतर्गत सभी कृषि योग्य भूमि वाले किसानों की पहचान, सत्यापन और उन्हें शामिल करने के लिए समय-समय पर विभिन्न ग्राम-स्तरीय विशेष संतृप्ति अभियान भी चलाए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय खाद्य एवं नीति अनुसंधान संस्थान द्वारा वर्ष 2019 में किसानों के जीवन पर पीएम-किसान योजना के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक अध्ययन भी किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट रूप से पता चलता है कि पीएम-किसान योजना के तहत वितरित धनराशि ने ग्रामीण आर्थिक विकास में उत्प्रेरक का काम किया है, किसानों के लिए ऋण संबंधी बाधाओं को कम करने में मदद की है और कृषि आदानों में निवेश बढ़ाया है। इस योजना ने किसानों की जोखिम उठाने की क्षमता को बढ़ाया है, जिससे वे जोखिम भरे लेकिन तुलनात्मक रूप से उत्पादक निवेश करने के लिए प्रेरित हुए हैं। पीएम किसान के तहत प्राप्त धनराशि से उन्हें अपनी कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने और शिक्षा, चिकित्सा, विवाह आदि जैसे अन्य खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है।

पीएम किसान योजना के तहत, किसानों के लिए वंचितों तक पहुंच सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। लाभों का डिजिटल और पारदर्शी वितरण हमेशा से एक प्रमुख उद्देश्य रहा है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, कृषि मंत्रालय ने किसान रजिस्ट्री बनाने की एक नई पहल शुरू की है। यह सुव्यवस्थित और सावधानीपूर्वक जांचा-परखा डेटाबेस किसानों को सामाजिक कल्याण लाभों तक पहुंचने के लिए जटिल प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता को समाप्त कर देगा।

यह महत्वपूर्ण विकास हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और कृषक समुदाय के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के कारण संभव हुआ है। किसान रजिस्ट्री की स्थापना से पहले, किसानों के लिए सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच प्राप्त करना एक समय लेने वाली प्रक्रिया थी। अब, इस रजिस्ट्री के शुरू होने से, किसान इन लाभों का लाभ सहजता और बिना किसी परेशानी के उठा सकेंगे।

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