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स्वदेशी रूप से विकसित सिलिकॉन फोटोनिक्स टेक्‍नोलॉजी सॉल्‍युशंस चेन्नई में लॉन्च किए गए

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने दो सिलिकॉन फोटोनिक्स प्रौद्योगिकी समाधानों का शुभारंभ किया: (क) फोटोनिक्स चिप विनिर्माण के लिए सिलिकॉन फोटोनिक्स प्रोसेस डिज़ाइन किट (पीडीके) और (ख) यूनिवर्सल पैकेजेड पीपीआईसी (प्रोग्रामेबल फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट) टेस्ट इंजन, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा प्रायोजित सीओई-सीपीपीआईसीएस, आईआईटी मद्रास [https://cppics.iitm.ac.in/] में स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के सीईओ अमितेश सिन्हा, आईआईटी मद्रास की डीओईई विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शांति भट्टाचार्य और केंद्र के शासी परिषद के सदस्य उपस्थित थे। यह शुभारंभ शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को हुआ। यह भारत के लिए सिलिकॉन फोटोनिक्स टेक्‍नोलॉजी सॉवरेंटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और भारतीय फोटोनिक्स अनुसंधान एवं विकास समुदाय के लिए एक साझा राष्ट्रीय सुविधा के रूप में कार्य करेगा।

स्वदेशी रूप से विकसित सिलिकॉन फोटोनिक्स प्रोसेस डिज़ाइन किट (पीडीके) में 50 से अधिक सत्यापित कम्‍पोनेंट हैं। यह पुस्‍तकालय भारत में उद्योगों, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठनों को उन्नत फोटोनिक आईसी विकसित करने के लिए आवश्यक डिज़ाइन सहायता प्रदान करती है। स्वदेशी रूप से विकसित यूनिवर्सल पीपीआईसी टेस्ट इंजन विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए फोटोनिक और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल के लिए एक अत्याधुनिक स्वचालित कैरेक्टराइजेशन प्लेटफॉर्म है।

एस. कृष्णन ने इस केंद्र के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास के अगले चरण का शुभारंभ भी किया। उन्होंने सीओई-सीपीपीआईसीएस की टीम को बधाई दी और कहा कि भारत में सिलिकॉन फोटोनिक्स वैश्विक स्तर की अत्याधुनिक तकनीक के बराबर पहुंच रहा है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत सिलिकॉन फोटोनिक्स फैब की स्थापना से इसे और बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव और आईएसएम के सीईओ अमितेश सिन्हा ने बताया कि विकसित की गई अत्याधुनिक सिलिकॉन फोटोनिक्स तकनीक के अनुप्रयोग क्लासिकल और क्वांटम दोनों क्षेत्रों में हैं। उपयुक्त उद्योग साझेदार के साथ, इस प्रकार की तकनीक को आगामी आईएसएम 2.0 (अनुसंधान एवं विकास विभाग) के तहत आगे तकनीकी सुधार और उत्पाद विकास के लिए समर्थन दिया जा सकता है। व्यावसायिक क्षमताओं के सफल प्रदर्शन के बाद, एकीकृत पैकेजिंग सुविधाओं से युक्त एक सिलिकॉन फोटोनिक्स फैब स्थापित किया जा सकता है।

मुख्य अन्‍वेषक प्रोफेसर बिजय कृष्णा दास ने कहा, “इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही से, हमारा केंद्र सिलिकॉन फोटोनिक्स एमपीडब्ल्यू फैब्रिकेशन रन को सक्षम करेगा और साथ ही व्यापक परीक्षण, पैकेजिंग और मॉड्यूल कैरेक्टराइजेशन की सुविधा भी प्रदान करेगा। इसे संभव बनाने में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अटूट समर्थन के लिए हम उनके बहुत आभारी हैं।”

सिलिकॉन फोटोनिक्स सीओई-सीपीपीआईसी, सीएमओएस-संगत सिलिकॉन फोटोनिक्स प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए उत्पाद अनुसंधान, विकास और विनिर्माण (पीआरडीएम) मॉडल का अनुसरण करता है। इसमें सिलटेरा मलेशिया फाउंड्री पार्टनर के रूप में और बेंगलुरु स्थित इजमो माइक्रोसिस्टम्स फोटोनिक आईसी पैकेजिंग पार्टनर के रूप में शामिल हैं।

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