भारत

एनएसओ ने सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत करने के लिए डिजिटल नवाचारों का अनावरण किया

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने हाल ही में आयोजित राज्य सरकार के मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान एक नया माइक्रोडेटा पोर्टल लॉन्च किया। डेटा पहुंच, उपयोगकर्ता अनुभव और आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली में उन्नत प्रौद्योगिकियों के एकीकरण को बढ़ाने में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों और आर्थिक जनगणना से एकत्र किए गए व्यापक सांख्यिकीय आंकड़ों के लिए एक केंद्रीकृत संग्रह केंद्र के रूप में कार्य करने वाला यह नया पोर्टल, पिछले पोर्टल के सामने आने वाली तकनीकी सीमाओं को दूर करेगा। विश्व बैंक प्रौद्योगिकी टीम के सहयोग से एमओएसपीआई ने एक आधुनिक, स्केलेबल प्रौद्योगिकी स्टैक को अपनाया है जो न केवल नवीनतम सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करता है बल्कि एक उत्तरदायी डिजाइन और डेटा एक्सेस तंत्र का भी समर्थन करता है। इस पोर्टल को https://microdata.gov.in/ पर देखा जा सकता है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी की वेबसाइट भी लॉन्च की गई। इससे मंत्रालय की क्षमता निर्माण पहल से संबंधित जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से लोगों तक पहुंच आसान हो जाएगी। वेबसाइट www.nssta.gov.in पर उपलब्ध है। इस पोर्टल और वेबसाइट को मंत्रालय के डेटा इंफॉर्मेटिक्स और इनोवेशन डिवीज़न द्वारा इन-हाउस विकसित किया गया है।

एमओएसपीआई ने आधिकारिक सांख्यिकी के उत्पादन में राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (एनआईसी) के उपयोग को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए एआई/एमएल-आधारित वर्गीकरण उपकरण के लिए अवधारणा का प्रमाण (पीओसी) भी प्रस्तुत किया। यह उपकरण हितधारकों को टेक्स्ट से जुड़ी जिज्ञासाओं को दर्ज करने की सुविधा देता और साथ ही इस पर शीर्ष पांच प्रासंगिक एनआईसी कोड का सुझाव देता है। यह नवाचार न केवल मैनुअल प्रयास को कम करता है बल्कि गणनाकर्ताओं की उत्पादकता भी बढ़ाता है जिससे अधिक सटीक डेटा संग्रह और अंततः बेहतर योजना और नीति-निर्माण में सहायक होता है। यह मंत्रालय द्वारा हाल ही में आयोजित हैकथॉन का परिणाम है।

इन पोर्टलों और वेबसाइट के साथ-साथ अभिनव एआई-संचालित उपकरणों का शुभारंभ, सांख्यिकी प्रणाली को मजबूत करने के लिए डेटा प्रबंधन के लिए नवीनतम तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने की दिशा में मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। ये पहल नीति निर्माण के लिए अधिक डेटा-संचालित दृष्टिकोण को बढ़ावा देंगी जिससे विकसित भारत के लक्ष्य में भी योगदान सुनिश्चित होगा।

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