भारत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पुर्तगाल के लिस्बन शहर की प्रतिष्ठित “सम्‍मान की कुंजी” प्रदान की गई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कल पुर्तगाल के लिस्बन के सिटी हॉल में आयोजित एक समारोह में लिस्बन के मेयर से लिस्बन शहर का ‘सिटी की ऑफ ऑनर’ प्राप्त किया।

राष्‍ट्रपति ने इस अवसर पर अपने संबोधन में इस सम्मान के लिए लिस्बन के मेयर और लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लिस्बन को अपने खुले विचारों, लोगों के उत्‍साहपूर्ण भाव और संस्कृति के साथ-साथ सहिष्णुता एवं विविधता के प्रति सम्मान के लिए जाना जाता है। उन्हें यह जानकर प्रसन्‍नता हुई कि लिस्बन एक ऐसा वैश्विक शहर है जो तकनीकी परिवर्तन, नवाचार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डिजिटल परिवर्तन के मामले में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत और पुर्तगाल भविष्‍य में भी सहयोग कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने पलासियो दा अजुडा में पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा द्वारा उनके सम्मान में आयोजित भोज में भाग लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे लोगों के बीच सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं और इन संबंधों ने हमारी सामूहिक अवधारणा पर अमिट छाप छोड़ी है। इनमें हमारा साझा अतीत शामिल है जो वास्तुकला, ऐतिहासिक स्थलों और भाषाओं के साथ-साथ हमारे व्यंजनों में भी झलकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह वर्ष विशेष महत्व रखता है क्योंकि हम भारत-पुर्तगाल द्विपक्षीय संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का उत्‍सव मना रहे हैं। हमारे प्राकृतिक सामंजस्‍य और विविध क्षेत्रों में सहयोग की क्षमता के साथ, हमारे ऐतिहासिक संबंध एक गतिशील और दूरदर्शी साझेदारी बनने की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। राष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रक्षा, आईटी, स्टार्ट-अप, अनुसंधान, शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत-पुर्तगाल सहयोग में निरंतर और प्रगतिशील रूप से हो रही वृद्धि पर प्रसन्नता हुई।

राष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्ट-अप और नवाचार जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता का उपयोग कर रहा है ताकि सभी को लाभ पहुंचाने वाला समावेशी और सतत विकास मॉडल तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत इन प्रयासों में पुर्तगाल को अपना भागीदार मानता है।

राष्ट्रपति ने यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को बढ़ावा देने में पुर्तगाल की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुर्तगाल की यूरोपीय संघ की अध्यक्षता के दौरान ही वर्ष 2000 में पहला भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था और मई 2021 में एक बार फिर पुर्तगाली अध्यक्षता के अंतर्गत पुर्तगाल में ऐतिहासिक “भारत-यूरोपीय संघ प्लस 27” नेतृत्व शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भारत-पुर्तगाल द्विपक्षीय संबंध और भी घनिष्ठ एवं व्यापक होंगे और यह न केवल हमारे लोगों अपितु पूरे विश्व के लिए लाभकारी होगा।

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