केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व आर्द्रभूमि दिवस से पहले भारत के रामसर नेटवर्क में दो नई आर्द्रभूमियों को शामिल करने की घोषणा की है। मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ जिले में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।
भूपेंद्र यादव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के रामसर नेटवर्क का विस्तार 276% से अधिक हुआ है, जो 2014 में 26 स्थलों से बढ़कर वर्तमान में 98 स्थल हो गया है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मान्यता पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मंत्री जी ने बताया कि ये दोनों आर्द्रभूमि सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियों को आवास प्रदान करती हैं। इन क्षेत्रों में चिंकारा, भेड़िये, काराकल, रेगिस्तानी बिल्लियाँ और रेगिस्तानी लोमड़ियाँ जैसे वन्यजीवों के साथ-साथ लुप्तप्राय पक्षी भी पाए जाते हैं।
भारत, ईरान के रामसर में 1971 में हस्ताक्षरित ‘आर्द्रभूमि पर सम्मेलन’ (रामसर सम्मेलन) के अनुबंधित पक्षों में से एक है। भारत 1 फरवरी 1982 को इस सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता बना।
विशेष संरक्षण महत्व वाले आर्द्रभूमि क्षेत्रों को अंतर्राष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि क्षेत्रों के रूप में नामित किया जा सकता है। ये स्थल महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत ढाँचों के अंतर्गत संरक्षण और प्रबंधन के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता के आदर्श उदाहरण के रूप में कार्य कर सकते हैं।
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