प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच सुनिश्चित करने और रणनीतिक संस्थागत सहयोग के माध्यम से फार्मास्युटिकल उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर मजबूत कर रहा है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) ने भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग के अधीन फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) और भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर), हाजीपुर, बिहार के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग और फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उद्देश्य प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों (पीएमबीजेके) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं के लिए गुणवत्ता आश्वासन ढांचे को मजबूत करना है। इस सहयोग के अंतर्गत, पीएमबीआई गुणवत्ता परीक्षण के लिए आईपीसी को जन औषधि दवाओं के यादृच्छिक रूप से चयनित बैच प्रस्तुत कर सकता है। यह साझेदारी दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए पीएमबीजेके में भारत की राष्ट्रीय फार्मुलरी (एनएफआई) के उपयोग को बढ़ावा देगी। इसका उद्देश्य देश भर के पीएमबीजेके में फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (पीवीपीआई) का क्यूआर कोड और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (1800-180-3024) प्रदर्शित करके फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों को मजबूत करना भी है, जिससे प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (एडीआर) की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिले और रोगी सुरक्षा में सुधार हो। इसके अतिरिक्त, आईपीसी और पीएमबीआई संयुक्त रूप से फार्मासिस्टों और हितधारकों के लिए दवाओं के तर्कसंगत उपयोग, फार्माकोविजिलेंस, एडीआर रिपोर्टिंग टूल्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा में फार्मासिस्टों की भूमिका पर संवेदीकरण, जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग और एनआईपीईआर, हाजीपुर के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन फार्मास्युटिकल विज्ञान और स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों के क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान, अकादमिक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। राष्ट्रीय महत्व का संस्थान, एनआईपीईआर हाजीपुर, फार्मास्युटिकल विश्लेषण, बायोलॉजिक्स और नैदानिक अनुसंधान में उन्नत विशेषज्ञता रखता है, जो इसे फार्माकोपियल विज्ञान और रोगी सुरक्षा को मजबूत करने में एक मूल्यवान भागीदार बनाता है। इस सहयोग में अशुद्धियों की प्रोफाइलिंग पर संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम शामिल होंगे, जिसमें नाइट्रोसेमाइन जैसी जीनविषाक्त अशुद्धियां और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया डेटा के साथ उनका सहसंबंध शामिल है, ताकि साक्ष्य-आधारित फार्माकोपियल सीमाएं स्थापित की जा सकें। यह बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और उभरते सेल और जीन थेरेपी उत्पादों के लिए विश्लेषणात्मक विधियों, गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल और संदर्भ मानकों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि उन्हें भारतीय फार्माकोपिया में शामिल किया जा सके।
दोनों संस्थान प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, सेमिनारों और सम्मेलनों के आयोजन में सहयोग करेंगे, साथ ही संकाय आदान-प्रदान पहलों और उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधाओं को साझा करने में भी सहयोग करेंगे। फार्मेसी स्नातकों और स्नातकोत्तरों के लिए इंटर्नशिप और फैलोशिप के अवसर, साथ ही शोध पत्रों, प्रशिक्षण नियमावली और शैक्षिक सामग्रियों का संयुक्त प्रकाशन, वैज्ञानिक जुड़ाव और संस्थागत क्षमता निर्माण को और मजबूत करेगा।
ये समझौता ज्ञापन गुणवत्ता आश्वासन, रोगी सुरक्षा, दवाओं के तर्कसंगत उपयोग और फार्मास्युटिकल मानकों में नवाचार को बढ़ावा देकर देश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत करने के लिए आईपीसी के निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं। इस प्रकार के सहयोग से फार्मास्युटिकल गुणवत्ता, नियामक उत्कृष्टता और सार्वजनिक स्वास्थ्य उन्नति में वैश्विक स्तर पर भारत की अग्रणी स्थिति और भी मजबूत होगी।
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