उच्चतम न्यायालय ने आज भारतीय दंड संहिता, आपराधिक दंड संहिता और साक्ष्य अधिनियम की जगह हाल ही में बनाए गए तीन आपराधिक कानूनों के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली अवकाश पीठ ने याचिकाकर्ता से व्यक्तिगत रूप से कहा कि यह याचिका खारिज किए जाने योग्य है।
याचिका पर विचार करने में शीर्ष अदालत की अनिच्छा को भांपते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए। इस अवकाश पीठ में न्यायमूर्ति पंकज मित्तल भी शामिल थे। न्यायालय ने कहा कि यह याचिका बहुत ही अनौपचारिक और लापरवाह तरीके से दायर की गई है। आखिर में याचिका को वापस लिया गया मानकर खारिज कर दिया गया।
जनहित याचिका में कहा गया था कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में कई खामियां और विसंगतियां हैं।
गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए हैं।…
भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है।…
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग-एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के निकट दत्तानगर…
भारत और मंगोलिया के रक्षा मंत्रालयों के संयुक्त कार्य समूह की आज उलानबातार में आयोजित…
भारत की क्वांटम प्रौद्योगिकी और सुरक्षित संचार क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण…
भारतीय प्रेस परिषद ने विरोध और धरना-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए दिशा-निर्देश…